logo

मूड

ट्रेंडिंग:

पंजाब के किसान अब किस बात के लिए करने लगे प्रदर्शन? चंडीगढ़ सीमा पर हुआ बवाल

पंजाब और चंडीगढ़ की सीमा पर कल किसान और चंडीगढ़ पुलिस आमने-सामने नजर आए। किसान चंडीगढ़ में राजभवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

Farmer Protest

किसानों का प्रदर्शन, Photo Credit: Social Media

पंजाब के किसान एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। चंडीगढ़ और मोहाली बॉर्डर पर उस समय हालात तनावपूर्ण हो गए जब किसान संगठनों ने पंजाब राजभवन की ओर मार्च करने की कोशिश की। किसानों का मकसद राज्यपाल को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपना था लेकिन पुलिस ने उन्हें चंडीगढ़ में दाखिल होने से रोक दिया। इसके बाद बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, पानी की बौछारें छोड़ीं और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई किसानों को हिरासत में लिए जाने और कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर सामने आई है। 

 

इस प्रदर्शन की अगुवाई संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठन कर रहे थे। किसान मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब के पास जमा हुए और वहां से चंडीगढ़ की ओर बढ़ने लगे। किसानों की मांग थी कि केंद्र सरकार एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी दे। इसके साथ ही उन्होंने अपने ज्ञापन में कुछ अन्य मांगों को भी शामिल किया था। किसानों का कहना है कि जब तक सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक खेती घाटे का सौदा बनी रहेगी और किसान बाजार की मनमानी के सामने कमजोर रहेंगे।

 

यह भी पढ़ें: गिग वर्कर्स हड़ताल पर क्यों हैं, क्या है उनकी मांग, क्यों सरकार से हुए नाराज?

 

 क्या हैं किसानों की मांगे?

किसानों की नाराजगी सिर्फ एमएसपी तक सीमित नहीं है। इस बार प्रदर्शन में नदी जल बंटवारे, पंजाब के अधिकारों, बिजली संशोधन बिल, बीज कानून, सहकारी कर्ज सीमा और धान सीजन में बिजली पानी की सप्लाई जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। किसान चाहते हैं कि पंजाब को नहर और सिंचाई पानी की पर्याप्त व्यवस्था मिले और धान की बुवाई के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो। किसान संगठन  'पंजाब पुनर्गठन एक्ट' की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। 

 

 इसके अलावा किसान प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज कानून 2025 का भी विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे कानून किसानों की आजादी और खेती की लागत पर असर डाल सकते हैं। किसान अपनी मांगो को लेकर पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन देना चाहते थे। 

झड़प के बाद तनाव

किसान चंडीगढ़ की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन चंडीगढ़ पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड में आ गई थी। मामला उस समय बिगड़ा जब किसानों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। कई जगह ट्रैक्टरों और लोहे की चेन की मदद से रास्ता खोलने की कोशिश की गई। 

 

पुलिस पहले से भारी संख्या में तैनात थी। जैसे ही किसानों का जत्था आगे बढ़ा, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सख्ती दिखाई। इससे मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। किसान नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने जा रहे थे। दूसरी ओर प्रशासन का कहना था कि कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था।

 

यह भी पढ़ें: दोगुने कैश का लालच देकर फंसाते थे, बिहार में हाइटेक ठग गैंग का भंडाफोड़

 

बीजेपी पर साधा निशाना

किसान नेताओं ने इस कार्रवाई के बाद केंद्र सरकार और बीजेपी पर भी निशाना साधा है। उनका कहना है कि 2020 के किसान आंदोलन के बाद भी किसानों की मूल मांगें अधूरी हैं। एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर सरकार ने अब तक ठोस फैसला नहीं लिया है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज हो सकता है। किसान नेताओं की आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक बुलाए जाने की बात भी सामने आई है। 


और पढ़ें