उत्तर प्रदेश की सियासत में कई बार सत्ता में रही बहुजन समाज पार्टी, अपनी खोई सियासी जमीन वापस पाने की तैयारी में जुट गई है। BSP चीफ मायावती ने पहले ही साफ घोषणा कर दी है कि वह यूपी में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगी।
बहुजन समाज पार्टी सूबे की सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पार्टी ने संगठन को मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। कई पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।
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अब पार्टी का जोर किस पर है?
पार्टी युवा वर्ग, दलित और मुस्लिम समुदाय को जोड़ने के लिए विशेष कैडर कैंप आयोजित कर रही है। इन कैंपों में कार्यकर्ता मतदाताओं को बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (bJP) को सत्ता में आने से रोकने वाली एकमात्र पार्टी बहुजन समाज पार्टी ही है।
क्या संदेश दे रही हैं मायावती?
मायावती यह संदेश देने की कोशिश कर रहीं हैं कि बहुजन समाज पार्टी के कार्यकाल में 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति पर काम किया जाता है। हालांकि हाल के चुनावों में बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
हर चुनाव में कमजोर हो रही है BSP
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 152 सीटों पर बहुजन समाज पार्टी ने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन सभी की जमानत जब्त हो गई। पूरे राज्य में उसे महज 1.17 लाख वोट मिले।
केरल में 140 सीटों में से 55 पर प्रत्याशी उतारे गए, जहां कुल 33 हजार वोट ही मिले। तमिलनाडु की 234 सीटों में से 118 पर लड़कर बहुजन समाज पार्टी को सिर्फ 53 हजार वोट मिले और सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। ऐसे में देखना होगा कि बहुजन समाज पार्टी यूपी में मतदाताओं को अपने पक्ष में कैसे लाएगी।
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अब किस रणनीति पर चल रहीं हैं मायावती?
पार्टी ने अब बूथ स्तरीय रणनीति पर जोर दिया है। मायावती ने भाजपा के बंगाल मॉडल को अपनाते हुए रैलियों की जगह बूथ स्तरीय कमेटियों को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर मतदाताओं से सीधे जुड़ने और पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। विपक्षी पार्टियों की रणनीतियों पर नजर रखने को भी कहा गया है।
आकाश आनंद को क्या जिम्मेदारी मिलेगी?
बहुजन समाज पार्टी के युवा नेता अकाश आनंद भी सक्रिय हो गए हैं। लंबे समय बाद वे केंद्र सरकार पर आक्रामक टिप्पणियां कर रहे हैं। नीट पेपर लीक और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि अकाश आनंद यूपी की राजनीति में फिर से बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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क्या चुनाव कैंपेन की जिम्मेदारी मिलेगी?
चर्चा है कि मायावती उन्हें चुनाव अभियान और संगठन की बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती हैं।मायावती ने 24 मई को लखनऊ में पूरे प्रदेश से संगठन के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है। इस बैठक में वे विधानसभा वार समीक्षा करेंगी। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हारे प्रत्याशियों के वोटों के अंतर का विश्लेषण किया जाएगा। किस कारण से प्रत्याशी हारा, उसकी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने के निर्देश दिए जाएंगे।
