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कैसे बचेगा BSP का कोर वोट? मायावती के सामने हैं कई चुनौतियां

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा एक साल के भीतर होनें हैं, ऐसे में बसपा के सामने अपने कोर वोटर को बचाने की चुनौती है।

BSP Chief mayawati

बसपा सुप्रीमो मायावती।

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लखनऊ। 1984 में कांशीराम द्वारा स्थापित बहुजन समाज पार्टी ने 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले बहुमत हासिल कर सियासत में तहलका मचा दिया था। दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के जरिए बसपा ने 206 सीटें हासिल की थीं। यूपी के साथ पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में भी बसपा ने जनाधार बढ़ाया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 21 लोकसभा सीटें हासिल की थीं।

 

2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद बसपा फिर से खड़ी नहीं हो पाई। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2014, 2019 व 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का केवल एक ही विधायक चुनाव जीत सका था। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के गठबंधन के साथ उसके 10 सांसद चुनाव जीते थे। गठबंधन टूटने के बाद बसपा का प्रदर्शन लगातार गिरता चला गया।

 

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14 वर्ष में 25 से 7 फीसदी रह गया वोट बैंक

बहुजन समाज पार्टी का 14 वर्ष में बुरी तरह पतन हुआ है। पार्टी का वोट बैंक 25 फीसदी से घटकर विधानसभा चुनाव में 12.88 फीसदी ही रह गया है। भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद में फंसी पार्टी को उसके कोर वोट बैंक ने ही नकार दिया। इसका जिम्मेदार पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को माना जा रहा है। बसपा के लिए चिंता की बात यह है कि अब उसके पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लग गई है।

नसीमुद्दीन सहित कई नेता पार्टी से निष्कासित

बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के शुरुआती दौर के नेता राम अचल राजभर, लालजी वर्मा, दारा सिंह चौहान, बाबू सिंह कुशवाहा, स्वामी प्रसाद मौर्य और नसीमुद्दीन सिद्दीकी सहित कई दिग्गज नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है। इसके बाद से पार्टी में मायावती के बाद सतीश मिश्रा, अशोक सिद्धार्थ व उनके भतीजे आकाश आनंद सहित चंद बड़े नेता ही बचे हैं। ऐसे में पार्टी का गिरता हुआ ग्राफ कैसे सुधरेगा, इसको लेकर लगातार मंथन किया जा रहा है।

 

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वाल्मीकि वोट बैंक पर बीजेपी ने लगाई सेंध

वर्ष 2014 के चुनाव से बीजेपी ने बसपा के वाल्मीकि वोट बैंक पर सेंध लगाई थी। वाल्मीकि वोटर बीजेपी के पक्ष में जुड़ गए। इसके बाद से हुए चुनाव में वाल्मीकि वोटरों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। बसपा के पास जाटव व कठेरिया समुदाय का वोट बैंक ही रह गया है।

जन्मदिन पर दमखम का प्रदर्शन

बसपा सुप्रीमो मायावती अपने जन्मदिन पर हर साल कोर वोट बैंक बचाने के लिए रैली बुलाकर दमखम का प्रदर्शन करती हैं। पूरे प्रदेश से लाखों की संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ के रमाबाई मैदान में जुटते हैं। वहां मायावती अपने वोटरों को साधने के लिए बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीधा हमला करती हैं।

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