उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार, इन दिनों अपनों के निशाने है। उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ, सरकार के एक सीनियर मंत्री का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यह मंत्री और कोई नहीं, निषादों के सबसे बड़े नेताओं में से एक संजय निषाद हैं। वह निषाद पार्टी के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने खुलकर यूपी पुलिस की एनकाउंटर नीति की आलोचना की है और इसे सुधारने की गुहार लगाई है।
संजय निषाद ने अपनी ही सरकार को घेर लिया है। उन्होंने गाजीपुर में हुए पुलिस एनकाउंटर में कमलेश बिंद की हत्या को फर्जी बताया है। व्यापारी विनीत राय की हत्या के आरोपी कमलेश बिंद को गुरुवार को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। पुलिस का दावा है कि कमलेश ने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में गोली चलाई गई।
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क्यों सरकार को घेर रहे हैं संजय निषाद?
विनीत राय की हत्या के आरोपी कमलेश बिंद के परिजन कह रहे हैं पुलिस ने परिवार के सामने उन्हें बुरी तरह मारा, अनजान जगह पर ले जाकर एनकाउंटर किया। कमलेश की पत्नी ने आरोप लगाया कि पुलिस वालों ने उनके पति को घसीटकर मारा। गाजीपुर में स्थानीय लोगों ने पुलिस के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव भी किया था। ज्यादातर लोग, इस एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं।
संजय निषाद, मंत्री, यूपी सरकार:-
हम सरकार के साथ अपने समाज की रक्षा के लिए खड़े हैं। अगर आप रक्षक की जगह भक्षक बनकर कार्रवाई करेंगे तो हमें इस विषय पर विचार करना होगा।
संजय निषाद क्यों नाराज हैं?
संजय निषाद लगातार योगी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने पहले कमलेश बिंद का गलत एनकाउंटर किया, अब बिंद समाज पर लाठियां बरसाईं, यह इस समुदाय का अपमान है। उन्होंने योगी सरकार से एनकाउंटर नीति पर फिर से विचार करने की अपील की है।
संजय निषाद, कैबिनेट मंत्री, यूपी:-
बिंद समुदाय गाजीपुर और जौनपुर में अच्छी संख्या में है। हमें समझना चाहिए कि 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी के आसपास की कई सीटें हमने खो दीं।
अब क्या चाहते हैं संजय निषाद?
संजय निषाद, कैबिनेट मंत्री, यूपी सरकार:-
गाजीपुर हार गए हैं। जौन पुर हार गए हैं। चारो तरफ बिंदों की संख्या अच्छी-खासी है। अधिकारी आंदोलन करने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की धमकी दे रहे हैं। यह अंग्रेजों का शासन है? यह पूरी तरह से तानाशाही है।
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संजय निषाद मांग कर रहे हैं कि इस फर्जी एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति पर मामूली आपराधिक मुकदमे दर्ज हों, उन्हें मार गिराया जा रहा है। बिंद समाज मजबूत स्थिति में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट के आसपास की सारी सीटें बीजेपी ने गंवा दी है, सिर्फ इसलिए कि निषाद और बिंद नाराज रहें। जुर्म के आधार पर सजा देने का काम तो अदालत का है, यह तो तानाशाही है।
विपक्ष क्या कह रहा है?
विपक्षी पार्टियां लगातार कह रही हैं कि उत्तर प्रदेश पुलिस खास समुदायों के लोगों को निशाना बना रही है। संजय निषाद भी अब सरकार के खिलाफ उतर आए हैं। सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। योगी सरकार, एनकाउंटर को अपनी उपलब्धि तो बता रही है लेकिन इसके खिलाफ जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है।
अगर नाराज हो जाए बिंद समाज तो क्या होगा?
यूपी में ओबीसी वर्ग 50 फीसदी से ज्यादा है। बिंद समाज की आबादी 1 से 1.5 प्रतिशत के बीच में है लेकिन यह वर्ग जहां है, बहुत सघन आबादी में है। पूर्वांचल के गंगा-यमुना मैदानी इलाकों में यह समाज निर्णायक स्थिति में है। खुद संजय निषाद कह चुके हैं कि मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, वाराणसी, प्रयागराज और मऊ जैसे जिलों में बिंद समाज, निर्णायक स्थिति में है। मझवां, भदोही, ज्ञानपुर, गाजीपुर सदर, जखनिया, जहूराबाद, सैदपुर, सकलडीहा, मुंगरा बादशाहपुर, मरियाहू, हंडिया और घोसी जैसी विधानसभा सीटों पर यह बिंद समाज की मजबूत पकड़ मानी जाती है।
अब संजय निषाद, खुलकर योगी सरकार के विरोध में उतरे हैं, इस वजह से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बिंद समाज भी पारंपरिक तौर पर 'केवट-बिंद बिरादरी' का हिस्सा है, दोनों समुदायों की एक-दूसरे पर निर्भरता है। अगर यह समुदाय नाराज हुआ तो 12 से ज्यादा सीटों पर बीजेपी को नुकसान हो सकता है।
संजय निषाद ही क्यों कर रहे हैं पैरवी?
संजय निषाद यूपी में 40 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। उनका कहना है कि निषाद समाज, गंगा और यमुना के मैदानी हिस्सों में है, जिसके वह प्रतिनिधि नेता हैं। अगर उन्हें सीटें दी जाती हैं तो एनडीए गठबंधन के जीतने की संभावना बढ़ेगी। वह योगी सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें मनाने की कोशिश में योगी सरकार उनकी बात भी सुने। योगी सरकार का इस मुठभेड़ पर रुख अभी तक स्पष्ट रहा है। उन्होंने पहले भी निषाद समुदाय पर हो रहे कथित जुल्मों को लेकर सरकार को घेरा था और दावा किया था कि निषाद समाज की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।
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बुलडोजर मुद्दे पर घिरे हैं सीएम योगी
योगी आदित्यनाथ सरकार, बुलडोजर एक्शन को लेकर भी अपनों के निशाने पर रही है। बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह आए दिन बुलडोजर एक्शन के खिलाफ बोलते हैं। उनका एक बयान सुर्खियों में रहा है, 'मैंने खुले मंच से बोला था कि बुलडोजर नीति का विरोधी हूं। बृजभूषण सिंह वह व्यक्ति है जो आपके दर्द-दुख को समझता है, इसलिए मैंने कहा कि घर बनाना बहुत मुश्किल है।' वह योगी सरकार से नाराज भी नजर आते हैं।
बृजभूषण शरण सिंह कई बार अपना असंतोष शायरी के जरिए जता भी चुके हैं। बलराम, बहराइच, गोंडा और अयोध्या में उनकी नाराजगी बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है। फिलहाल उनके बेटे प्रतीक भूषण बीजेपी से विधायक हैं और दूसरे बेटे करण भूषण सिंह सांसद हैं। गठबंधन के दूसरे साथी भी इस कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं करते हैं।
