जीवन और मृत्यु एक ऐसी प्रक्रिया है जो हर व्यक्ति के जीवन में जरूर आती है। कोई भी व्यक्ति मृत्यु को टाल नहीं सकता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी आत्मा को मोक्ष मिल जाता है तब वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है। गरुड़ पुराण के मुताबिक उसी व्यक्ति को मोक्ष मिलता है जिसने अच्छे कर्म किए हों, वरना उसे नरक मिलता है, जिससे व्यक्ति जीवन-मरण के चक्र में फंसा रहता है। इसके अलावा आब्राहमिक धर्मों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा को लेकर अलग मान्यताएं हैं।

 

हिन्दू धर्म के गरुड़ पुराण के मुताबिक, कोई भी आत्मा 84 लाख योनियों के बाद मानव योनि में जन्म लेती है। इसमें कीड़े-मकोड़े, पेड़-पौधे, पक्षी और जानवर जैसी 84 लाख योनियों में आत्मा जीवन यात्रा करती है। इस वजह से इंसानों को अपने जीवनकाल में अच्छे कर्म करने चाहिए, ताकि मोक्ष की प्राप्ति हो सके। इसी प्रकार इस्लाम धर्म में भी माना जाता है कि किसी रूह को बड़ी मुश्किल से इंसान का जन्म मिलता है। इसी वजह से इंसान को दीन को अपनाना चाहिए, ताकि कयामत के दिन उसकी रूह को सुकून मिल सके।

 

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इस्लाम धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा

 

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, जब इंसान की मृत्यु हो जाती है तो उसे कब्र में दफन किया जाता है। इसके बाद अल्लाह के आदेश पर दो फरिश्ते कब्र के पास आते हैं। इन दो फरिश्तों का नाम मुनकर और नकीर बताया गया है, जो कब्र में जाकर रूह से 3 सवाल पूछते हैं।

 

दोनों फरिश्ते मृत व्यक्ति से सवाल पूछते हैं कि उसका रब कौन है। दूसरा सवाल यह पूछा जाता है कि उसका दीन यानी धर्म क्या है। इसके अलावा अल्लाह के बारे में उसकी क्या मान्यता थी। इन सवालों के जरिए फरिश्ते परखते हैं कि व्यक्ति ने अपने जीवन में दीन यानी धर्म के बारे में क्या सीखा है। जो व्यक्ति इन सवालों का सही जवाब देता है, उसकी कब्र को जन्नत जैसा सुंदर बना दिया जाता है। वहीं जो इन सवालों का गलत जवाब देता है, उसकी कब्र को नरक जैसा बना दिया जाता है।

 

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कब्र में रहने वाली आत्माओं के कर्मों का हिसाब-किताब कयामत की रात होता है। इस्लाम धर्म में कयामत की रात उसे कहा जाता है जब पूरी पृथ्वी का अंत हो जाएगा। उसी दिन अल्लाह हर व्यक्ति के कर्मों का न्याय करेंगे।

 

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार आत्मा की यात्रा

 

गरुड़ पुराण के मुताबिक मृत्यु के बाद यमराज व्यक्ति के कर्मों का हिसाब करते हैं। जिन लोगों के कर्म अच्छे नहीं होते उन्हें नरक का दंड मिलता है, जबकि जिन लोगों के कर्म अच्छे होते हैं उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है, साथ ही भगवान के दर्शन भी होते हैं। जिन आत्माओं को जीवन में कुछ सीखना बाकी रह जाता है, उन्हें दोबारा जन्म लेना पड़ता है। वहीं अच्छे कर्म करने वाले लोगों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

 

नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी की हम पुष्टि नहीं करते हैं।