परशुराम जयंती हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पावन दिन अप्रैल महीने में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जिन्होंने अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए शस्त्र उठाए थे। परशुराम जयंती के दिन भक्तजन व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं।
परशुराम जयंती के दिन कई लोग व्रत रखते हैं लेकिन कई भक्तों को कन्फ्यूजन हो रहा है कि इस साल किस दिन व्रत रखना चाहिए। आइए जानते हैं परशुराम जयंती कब मनाई जाएगी, साथ ही यह भी जान लीजिए कि इस व्रत के दिन किस प्रकार पूजा-अर्चना की जाती है।
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कब है परशुराम जयंती?
हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल 19 अप्रैल के दिन परशुराम जयंती का पर्व है, जो सुबह 10 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल की सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस वजह से जिन लोगों को परशुराम जयंती के दिन व्रत रखना है, वे 19 अप्रैल को व्रत रख सकते हैं।
पूजा का शुभ समय
इस साल शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक पूजा का मुहूर्त शुभ है। इस समय पूजा-अर्चना करने से भगवान प्रसन्न होंगे और भक्तों को आशीर्वाद देंगे। अब सवाल उठता है कि भक्तों को पूजा-अर्चना किस प्रकार करनी चाहिए।
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परशुराम जयंती के दिन बातों का ध्यान रखें
परशुराम जयंती के दिन सभी भक्तों को सुबह-सुबह उठकर स्नान करके भगवान की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। जिन लोगों ने व्रत नहीं रखा, वे भी भगवान परशुराम की पूजा कर सकते हैं। इस दिन दान करना शुभ माना जाता है, इसलिए जिन लोगों की इच्छा हो वे जरूरतमंद लोगों को रुपये, कपड़े या अनाज का दान करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।
