अक्षय तृतीया सनातन धर्म की सबसे शुभ तिथियों में से एक है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन पूजा-पाठ, दान और अन्य शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। हिन्दू धर्म में यह तिथि इसलिए अहम है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु ने अलग-अलग युगों में तीन अवतार लिए थे। इस दिन भगवान विष्णु ने परशुराम से लेकर नर नारायण जैसे अवतार धारण किए थे।
इसी वजह से अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के तीन अवतार परशुराम, नर नारायण और हयग्रीव की चर्चा की जाती है। इन अवतारों का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना करना और अधर्म को समाप्त करना था। अब सवाल उठता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान ने किस वजह से परशुराम, हयग्रीव और नर-नारायण के अवतार लिए थे।
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भगवान विष्णु ने परशुराम का अवतार क्यों लिया?
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, महिष्मती नगर में सहस्त्रबाहु नामक राजा राज्य करता था। उसे अपनी शक्तियों पर बेहद घमंड था। वह अपने राज्य के लोगों को परेशान करता, महिलाओं का अपमान करता था, साथ ही धर्म और वेदों को मिथ्या बताकर ब्राह्मणों का निरादर करता था। एक दिन वह अपनी प्रजा के साथ जंगल में पहुंचा, जहां वह जमदग्नि ऋषि के आश्रम चला गया और वहीं विश्राम करने लगा। यह देख जमदग्नि ऋषि ने राजा की खूब मेहमाननवाजी की। जानकारी के लिए बता दें कि भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि ही थे।
जमदग्नि ऋषि के पास भगवान इंद्र के आशीर्वाद के रूप में कामधेनु गाय थी, जो बेहद चमत्कारी मानी जाती थी। उसने सहस्त्रार्जुन के भोजन के लिए जंगलों से फल इकट्ठा किए थे। यह देखकर राजा सहस्त्रार्जुन ने कामधेनु गाय को जमदग्नि ऋषि से मांग लिया लेकिन ऋषि ने इनकार कर दिया। इसके बाद राजा को गुस्सा आ गया। उसने जमदग्नि ऋषि के आश्रम को उजाड़ दिया और गाय को अपने साथ ले जाने लगा लेकिन गाय वहां से भागकर स्वर्ग लोक चली गई। जब परशुराम जंगल से वापस आए और अपने घर की हालत तथा पिता का अपमान देखा तो वह क्रोधित हो गए। इसके बाद उन्होंने राजा का वध किया। इस प्रकार उन्होंने घमंडी क्षत्रियों का विनाश कर अन्याय को समाप्त किया।
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हयग्रीव का अवतार
धार्मिक कथाओं के अनुसार, एक बार दैत्य रसातल ने ब्रह्मा जी के वेदों को चुरा लिया था। इसके बाद ब्रह्मा जी वेदों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु के पास गए। तब भगवान विष्णु ने हयग्रीव का अवतार लिया। यह भगवान विष्णु का एक प्रमुख अवतार माना जाता है। हयग्रीव ने दैत्यों का वध किया और वेदों को वापस ब्रह्मा जी को सौंप दिया।
नर नारायण अवतार की लीला क्या है ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नर-नारायण भगवान विष्णु का चौथा अवतार माना जाता है। इस अवतार के जरिए भगवान विष्णु ने धर्म का प्रचार-प्रसार किया। इस अवतार में भगवान विष्णु ने दो भाइयों के रूप में जन्म लिया था।एक का नाम नर था और दूसरे का नाम नारायण। दोनों भाइयों ने उत्तराखंड के पहाड़ों में कठोर तपस्या की और धर्म का प्रचार किया। इन्हीं पवित्र स्थलों पर बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम स्थापित हुए।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।
