तमिलनाडु में कन्याकुमारी के पास एक ऐसा पावन धाम है, जिसे हम 'शुचींद्रम शक्तिपीठ' के नाम से जानते हैं। इसे 'स्थाणु माल अयन' मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के एक ही शिवलिंग में आपको ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों देवताओं के दर्शन एक साथ हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे थे, तब यहां उनके ऊपरी जबड़े का दांत गिरा था, जिसके बाद यह स्थान 51 शक्तिपीठों में शामिल हो गया।
इस मंदिर के नाम शुचींद्रम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि महर्षि गौतम के शाप से मुक्ति पाने के लिए देवराज इंद्र ने इसी स्थान पर स्नान किया था और उन्हें शुचिता यानी पवित्रता प्राप्त हुई थी। आज भी श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां दर्शन और स्नान करने से मन पवित्र हो जाता है और पुराने पापों से मुक्ति मिलती है। यहां माता 'नारायणी' के रूप में विराजमान हैं और उनके साथ भगवान शिव 'संहार भैरव' के रूप में उनकी रक्षा करते हैं।
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मंदिर की कुछ खास बातें
22 फीट ऊंचे हनुमान जी: मंदिर परिसर में भगवान हनुमान की एक विशाल प्रतिमा है, जिसे सिर्फ एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इसकी ऊंचाई और भव्यता देखकर भक्त दंग रह जाते हैं।
बोलते हुए संगीत स्तंभ: यहां की नक्काशी इतनी बारीक है कि मंदिर के पत्थर के खंभों को थपथपाने पर उनसे संगीत की मधुर आवाज निकलती हैं। यह प्राचीन भारतीय वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है।
हीरों से चमकती माता: नवरात्रि और चैत्र पूर्णिमा जैसे खास मौकों पर माता नारायणी का श्रृंगार असली हीरों से किया जाता है। उस समय मां का दिव्य रूप देखने लायक होता है।
बाणासुर का अंत: लोक मान्यताओं के अनुसार, इसी क्षेत्र में माता ने अत्याचारी राक्षस बाणासुर का वध किया था। यहां माता के मंदिर के पास ही उनकी सखी भद्रकाली का भी मंदिर स्थित है।
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कैसे पहुंच सकते हैं?
यह मंदिर कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम रोड पर स्थित है। अगर आप शांति, अध्यात्म और इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यहां की यात्रा आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
