फरवरी के महीने में खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। आगामी 17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। हालांकि, भारत के नजरिए से राहत की बात यह है कि यह ग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि जब ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, तो इसके किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
अक्सर ग्रहण को लेकर समाज में कई तरह के अंधविश्वास और डर देखे जाते हैं लेकिन वैज्ञानिक इसे केवल एक खगोलीय घटना मानते हैं। चूंकि भारत में यह नजर नहीं आएगा इसलिए यहां सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा। आइए जानते हैं कि इस दौरान विशेष सावधानी की जरूरत है या नहीं।
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गर्भवती महिलाओं के लिए क्या हैं नियम?
- आमतौर पर ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कई नियमों में बांध दिया जाता है लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।
- आप बिना किसी डर के रसोई का काम कर सकती हैं, जैसे सब्जी काटना या खाना पकाना।
- खाने-पीने पर कोई पाबंदी नहीं है और आप अपनी इच्छा अनुसार मंदिर में पूजा-पाठ भी कर सकती हैं।
- अगर घर से बाहर निकलना जरूरी है, तो आप निश्चिंत होकर जा सकती हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर असर
मान्यता है कि ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर असर डालती है लेकिन इस बार भारत में ग्रहण न दिखने के कारण बच्चों के रूटीन में बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। बच्चे सामान्य दिनों की तरह बाहर खेल सकते हैं और बुजुर्गों को भी अपनी सेहत या मानसिक स्थिति को लेकर तनाव लेने की जरूरत नहीं है।
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परंपरा का पालन करना चाहें तो
भले ही भारत में इसका प्रभाव नहीं है लेकिन जो लोग अपनी परंपराओं और पुरानी मान्यताओं को मानना चाहते हैं, वे ये आसान तरीके अपना सकते हैं:
- आंखों की सुरक्षा: कभी भी सूर्य ग्रहण को सीधे आंखों से न देखें, इससे रेटिना को नुकसान पहुंच सकता है।
- तुलसी का प्रयोग: शुद्धता बनाए रखने के लिए खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालना एक पुरानी परंपरा है।
- सकारात्मकता: ग्रहण के समय मंत्रों का जाप या ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है।
- नुकीली चीजें: पारंपरिक तौर पर इस दौरान सुई, कैंची या चाकू जैसी चीजों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
