गुवाहाटी की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूती देने वाले उग्रतारा मंदिर को लेकर लोगों में आस्था और जिज्ञासा बनी रहती है। कामाख्या पीठ के नजदीक स्थित यह प्राचीन शक्तिस्थल तंत्र साधना, रहस्यमयी मान्यताओं और पौराणिक कथाओं की वजह से विशेष महत्व रखता है। नए साल और नवरात्र जैसे धार्मिक अवसरों के साथ ही देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मान्यता है कि देवी तारा के इस उग्र स्वरूप के दर्शन मात्र से भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। 

 

यही वजह है कि गुवाहाटी आने वाले भक्त अब कामाख्या के साथ-साथ उग्रतारा मंदिर को भी अपनी तीर्थ यात्रा का अहम हिस्सा बना रहे हैं। बढ़ती श्रद्धा के बीच मंदिर से जुड़ा इतिहास, मान्यताएं और इसके रहस्यमय पहलू एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।

 

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उग्रतारा मंदिर की विशेषता

उग्रतारा मंदिर देवी तारा को समर्पित है, जिन्हें मां दुर्गा के उग्र स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। यहां देवी की प्रतिमा शांत रूप में नहीं, बल्कि उग्र और शक्तिशाली स्वरूप में स्थापित है। यही वजह है कि इस मंदिर को तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

 

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मां तारा को उग्र शक्ति के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों के भय, कष्ट और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत रहस्यमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।

 

 

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मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

मान्यता है कि उग्रतारा माता के दर्शन करने से जीवन में आने वाले बड़े संकट, मानसिक भय और शत्रु बाधाएं दूर हो जाती हैं। विशेष रूप से जो लोग तंत्र-मंत्र, नकारात्मक शक्तियों या किसी गहरे संकट से पीड़ित होते हैं, वे यहां आकर मां तारा की आराधना करते हैं।

 

ऐसा भी माना जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मां तारा तुरंत फल देती हैं। तांत्रिक साधक मानते हैं कि यह स्थान सिद्धियों की प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली है।

मंदिर से जुड़े रहस्य

उग्रतारा मंदिर को लेकर कई रहस्यमयी मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि रात के समय यहां विशेष आध्यात्मिक गतिविधियां होती हैं। कुछ लोगों का विश्वास है कि अमावस्या और विशेष तांत्रिक तिथियों पर मंदिर के आसपास अलग ही ऊर्जा महसूस की जा सकती है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर प्राचीन काल से ही तंत्र साधना का केंद्र रहा है और यहां कई सिद्ध साधकों ने कठिन तपस्या की है। यही वजह है कि आज भी इस मंदिर को रहस्य और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के वियोग में उनके शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब सती के शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे। कहा जाता है कि माता सती की नाभि या शक्ति का अंश इस स्थान पर गिरा था, जिससे यह क्षेत्र अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली बन गया।

 

देवी तारा को तंत्र शास्त्र में दस महाविद्याओं में से एक माना गया है। उग्रतारा मंदिर में मां तारा को ही उग्र महाविद्या स्वरूप में पूजा होती है, जो अज्ञान, भय और अंधकार का नाश करती हैं।

मंदिर तक पहुंचने का रास्ता

उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी शहर के भीतर ही स्थित है और यहां पहुंचना काफी आसान है।

  • नजदीकी रेलवे स्टेशन: गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 2 से 3 किलोमीटर है। स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं।
  • नजदीकी एयरपोर्ट: लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मंदिर करीब 20 किलोमीटर दूर है। यहां से टैक्सी के जरिए मंदिर पहुंचा जा सकता है।
  • सड़क मार्ग: गुवाहाटी शहर के किसी भी हिस्से से स्थानीय बस, ऑटो या निजी वाहन से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।