29 मार्च के दिन ईसाई धर्म के लोगों ने पाम संडे मनाया। पाम संडे उत्सव को खजूर पर्व भी कहा जाता है। यह उत्सव ईसा मसीह के यरूशलेम में एक राजा के रूप में प्रवेश करने की खुशी में मनाया जाता है। ईसाई धर्म में पाम संडे के बाद पवित्र सप्ताह (Holy Week) की शुरुआत होती है। हफ्ते के अंत में गुड फ्राइडे मनाया जाता है। इस बार 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे का त्योहार मनाया जाएगा। गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह के क्रूस यानी शूली पर चढ़ाए जाने की घटना को याद किया जाता है। उस दिन चर्च में जाकर प्रार्थना करने की मान्यता है।
पाम संडे के दिन दुनिया भर में ईसाई धर्म के लोग सुबह-सुबह चर्च जाकर प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना के बाद सभी श्रद्धालु मिलकर जुलूस निकालते हैं। इस दिन लोग खजूर की शाखाओं को यीशु मसीह के समक्ष अर्पित करते हैं। खजूर की शाखाएं लोग अपने जुलूस में भी ले जाते हैं। ईसाई धर्म के जानकारों के अनुसार इन शाखाओं को बचाकर रखा जाता है, जिन्हें बाद में जलाया जाता है। जली हुई शाखाओं की राख को संभाल कर रखा जाता है। इस राख का उपयोग ऐश वेन्सडे के त्योहार में किया जाता है। बता दें ऐश वेन्सडे अगले साल 27 फरवरी को मनाई जाएगी। खजूर की शाखाओं की राख को पापों के पश्चाताप का प्रतीक माना जाता है। अब सवाल उठता है कि पाम संडे मनाने के पीछे कहानी क्या है।
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पाम संडे उत्सव की कहानी क्या है?
ईसाई धर्म के जानकारों के मुताबिक, पाम संडे के दिन ईसा मसीह जब यरूशलेम जा रहे थे तो उन्होंने अपने दो शिष्यों से कहा कि सामने वाले गांव में जाओ और वहां बंधा हुआ एक गधा और उसका बच्चा लेकर आओ। अगर कोई सवाल पूछे तो कह देना कि ईश्वर को इनकी आवश्यकता है। शिष्यों ने ईसा मसीह के कहने के अनुसार वैसा ही किया। दोनों शिष्य गधे और उसके बच्चे को ले आए और उन पर कपड़े डाल दिए, जिसके बाद ईसा मसीह गधे पर सवार हो गए। इसके बाद वह यरूशलेम में प्रवेश करते हैं, जहां लोगों ने उनका स्वागत किया।
ईसा मसीह का घोड़े की बजाय गधे पर यूं ही सवार होकर नहीं आए थे, बल्कि यह एक भविष्यवाणी से जुड़ा हुआ था। ईसाई धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, सदियों पहले यह भविष्यवाणी की गई थी कि यरूशलेम में एक राजा आएगा, जो धार्मिक और समाज का उद्धार करने वाला होगा और वह घोड़े की बजाय गधे पर सवार होकर आएगा। इसी वजह से ईसा मसीह गधे पर सवार होकर आए।
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हालांकि, गधे पर सवार होकर आने की एक और वजह भी बताई जाती है। प्राचीन काल में एक राजा युद्ध के समय घोड़े पर सवार होते थे, जबकि शांति के समय गधे पर। इसी तरह यीशु मसीह का गधे पर सवार होकर आना विनम्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।
