logo

मूड

ट्रेंडिंग:

पूजा से ज्यादा सत्संग पर क्यों जोर देते हैं कबीर पंथ के अनुयायी?

संत कबीर के विचारों को कई लोग मानते हैं। जान लीजिए कबीरपंथी लोग कौन से त्योहार मनाते हैं और कबीर के विचार क्या थे।

news image

प्रतीकात्मक तस्वीर,Photo Credit- Sora

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

कबीरपंथी वे लोग हैं जो संत कबीर के विचारों को अपने जीवन में मानते और अपनाते हैं। संत कबीर के विचारों को न केवल हिंदू बल्कि मुस्लिम धर्म के लोग भी मानते हैं। कबीरपंथी लोग निराकार ईश्वर में विश्वास करते हैं। उनका मानना है कि ईश्वर का कोई आकार नहीं होता है। इस वजह से वे किसी भगवान की सजीव मूर्ति की पूजा नहीं करते, बल्कि अपने ईश्वर का स्मरण करते हैं। कबीर समुदाय के लोग हर साल ज्येष्ठ मास में संत कबीर जयंती मनाते हैं। इस दिन संत कबीर के स्मरण में भजन-कीर्तन और उनके उपदेशों का पाठ किया जाता है। संत कबीर धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि समाज सुधारक के तौर पर भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

 

माना जाता है कि देश में 96 लाख लोग कबीरपंथी हैं, जिनमें हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और जैन धर्म के लोग शामिल हैं। कबीर के विचारों को मानने वाले अनुयायी कंठी पहनते हैं और कबीर बीजक, रमैनी जैसे ग्रंथों के प्रति पूज्य भावना रखते हैं। इस पंथ में गुरु का विचार सर्वोच्च होता है। अब सवाल उठता है कि संत कबीर के विचारधारा क्या है, जिन्हें कबीरपंथी मानते है।

 

यह भी पढ़ें: 29  या 30 मार्च, कब है कामदा एकादशी? मुहूर्त, कथा से पूजन विधि तक, सब जानिए


कबीर के विचार क्या हैं, जिन्हें कबीरपंथी मानते हैं

 

निराकार ईश्वर में विश्वास - संत कबीर का मानना था कि ईश्वर निराकार है। वह कर्मकांड जैसे रोजा, ईद, मंदिर, मस्जिद और मूर्तिपूजा का विरोध करते थे। उनका कहना था कि ईश्वर व्यक्ति के मन में वास करता है।


मानवता और समानता - संत कबीर ने जाति, वर्ग और धर्म के बंधनों को खारिज किया और सभी मनुष्यों को एक समान माना। इसी वजह से कबीरपंथी लोग सभी धर्म और जातियों को समान मानते हैं।

 

यह भी पढ़ें: शनि और सूर्य के संयोग से क्या चमकेगा आपका भाग्य? पढ़ें राशिफल

 


सादा जीवन -कबीरपंथी लोग सादा जीवन जीने में विश्वास करते हैं क्योंकि संत कबीर सादगी, पवित्रता, सत्यनिष्ठा और शाकाहारी भोजन पर जोर देते थे।


कर्म प्रधान जीवन - संत कबीर का मानना था कि व्यक्ति को अपने जीवन में कर्म प्रधान होना चाहिए। इसलिए कबीरपंथी अनुयायी अपने कर्मों को प्राथमिकता देते हैं।


गुरु ही मार्गदर्शक - कबीर पंथ में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु को ईश्वर तक पहुंचाने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। इसी वजह से कबीरपंथी लोग गुरु के विचारों को अपने जीवन में अपनाते हैं।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।

Related Topic:

और पढ़ें