कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर भगवान शिव का एक प्रसिद्ध और पुराना मंदिर स्थित है। पहले इस मंदिर को केम्प फोर्ट शिव मंदिर कहा जाता था लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर शिवोहम शिव मंदिर रख दिया गया। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी। मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान शिव की प्रतिमा है, जो पद्मासन मुद्रा में विराजमान है। प्रतिमा के पीछे बहती हुई गंगा का दृश्य दिखाया गया है। इसके चारों ओर बनाया गया कृत्रिम हिमालय मंदिर की सुंदरता को और बढ़ा देता है।

 

यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मंदिर किसी विशिष्ट जाति या पंथ तक सीमित नहीं है। यहां आने वाले भक्त 'शिवोहम' के दर्शन को समझते हैं। मंदिर परिसर में भगवान गणेश की 32 फीट ऊंची प्रतिमा और 25 फीट ऊंचा शिवलिंग भी स्थापित है, जो अपनी बनावट और भव्यता के कारण पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

 

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मंदिर की प्रमुख विशेषताएं

65 फीट ऊंची शिव प्रतिमा मंदिर की सबसे बड़ी पहचान भगवान शिव की विशाल सफेद प्रतिमा है। यह मूर्ति भगवान शिव को ध्यान मुद्रा में दर्शाती है, जो शांति और शक्ति का प्रतीक है।

 

12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मंदिर परिसर में भारत के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां बनाई गई हैं। ऐसा कहा जाता है कि यदि आप पूरे भारत की यात्रा नहीं कर सकते तो यहां आकर आप उन सभी दिव्य ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का अनुभव एक ही स्थान पर कर सकते हैं।

 

 

आध्यात्मिक गुफा यात्रा यहां एक 'हिमालयन गुफा' बनाई गई है, जहां से गुजरते हुए भक्त अमरनाथ यात्रा जैसा अनुभव प्राप्त करते हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि उनको यहां आध्यात्मिक शांति और खुद को समझने का मौका मिलता है। 

हीलिंग स्टोन मंदिर में एक विशेष पत्थर है जिसे 'हीलिंग स्टोन' कहा जाता है। भक्तों का मानना है कि इसे छूने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव दूर होता है।

 

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रात का भव्य नजारा सूर्यास्त के बाद जब मंदिर की विशेष लाइटें जलाई जाती हैं, तब शिव प्रतिमा की आभा अलौकिक हो जाती है। विशेष अवसरों जैसे महाशिवरात्रि पर यहां लाखों की संख्या में भक्त उमड़ते हैं।

 


यहां दर्शन की सुविधा निःशुल्क है। अगर कोई भक्त स्पेशल दर्शन करना चाहता है, तो उसके लिए शुल्क देना पड़ सकता है। यह मंदिर सप्ताह के सभी 7 दिन, 24 घंटे खुला रहता है, इसलिए यह मंदिर बहुत खास है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।