शहरों में पालतू कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ ही उनकी देखभाल को लेकर लोगों की समझ भी पहले से बेहतर हुई है। अब कुत्तों को सिर्फ घर की सुरक्षा या साथ निभाने वाला जानवर नहीं माना जाता, बल्कि उन्हें परिवार के सदस्य की तरह रखा जाता है। ऐसे में उनकी सेहत, सफाई और आराम का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। ग्रूमिंग इसी देखभाल का एक अहम हिस्सा है, जिसे कई लोग सिर्फ दिखावे या सुंदरता से जोड़कर देखते हैं, जबकि इसका सीधा संबंध कुत्ते की सेहत और व्यवहार से होता है।
ग्रूमिंग का मतलब सिर्फ कुत्ते को नहलाना या उसके बाल काटना नहीं है, बल्कि इसमें उसकी पूरी बॉडी केयर शामिल होती है। इसमें ब्रशिंग, नाखून काटना, कान साफ करना, दांतों की सफाई, त्वचा की जांच और जरूरत पड़ने पर हेयर ट्रिमिंग जैसी चीजें शामिल होती हैं। अगर इन चीजों को नियमित रूप से किया जाए तो कुत्ते को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है और उसकी लाइफ क्वालिटी बेहतर होती है।
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ग्रूमिंग क्यों है जरूरी?
कुत्तों की त्वचा और बाल उनकी सेहत का आईना होते हैं। अगर कुत्ते के बाल उलझे हुए हैं या त्वचा पर गंदगी जमा हो रही है, तो इससे इंफेक्शन, खुजली और फंगल जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नियमित ब्रशिंग से न सिर्फ बाल सुलझे रहते हैं, बल्कि ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। इससे कुत्ते का कोट शाइनी और हेल्दी दिखता है।
इसके अलावा, नाखून ज्यादा बढ़ जाने पर कुत्ते को चलने में दिक्कत हो सकती है। कई बार लंबे नाखून मुड़कर पंजों में चुभने लगते हैं, जिससे दर्द और इंफेक्शन हो सकता है। कानों की सफाई ना करने पर वैक्स जमा हो जाता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ग्रूमिंग सिर्फ बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि पूरी हेल्थ के लिए जरूरी है।
कितनी बार करनी चाहिए ग्रूमिंग?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका कुत्ता किस ब्रीड का है। लंबे बालों वाले कुत्तों जैसे शिह त्जू, ल्हासा अप्सो या गोल्डन रिट्रीवर को ज्यादा ग्रूमिंग की जरूरत होती है। इन्हें हफ्ते में 3-4 बार ब्रश करना जरूरी होता है। वहीं छोटे बालों वाले कुत्तों को हफ्ते में 1-2 बार ब्रश करना काफी होता है। नहलाने की बात करें तो आमतौर पर महीने में 2 से 4 बार नहलाना पर्याप्त होता है। हालांकि, अगर कुत्ता ज्यादा बाहर जाता है या गंदा हो जाता है, तो जरूरत के हिसाब से नहलाया जा सकता है। लेकिन बहुत ज्यादा नहलाने से उनकी त्वचा ड्राई हो सकती है। इसलिए नियमित तौर पर नहलाएं।
घर पर करें या पार्लर जाएं?
आजकल बड़े शहरों में डॉग ग्रूमिंग पार्लर तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां प्रोफेशनल ग्रूमर कुत्तों की पूरी देखभाल करते हैं। अगर आपके पास समय की कमी है या आप सही तरीके से ग्रूमिंग नहीं कर पा रहे हैं, तो पार्लर एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
हालांकि, बेसिक ग्रूमिंग जैसे ब्रशिंग, कान साफ करना और दांतों की सफाई घर पर भी आसानी से की जा सकती है। इससे कुत्ते और मालिक के बीच बॉन्डिंग भी मजबूत होती है। पार्लर में सिर्फ हेयर कट, डीप क्लीनिंग या स्पेशल ट्रीटमेंट के लिए जाना बेहतर रहता है।
गर्मियों में ग्रूमिंग का खास ध्यान
गर्मी के मौसम में कुत्तों की ग्रूमिंग और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। इस समय उनके बाल तेजी से गंदे होते हैं और त्वचा पर पसीना व धूल जम जाती है। कई लोग सोचते हैं कि गर्मियों में कुत्ते के पूरे बाल काट देना सही है लेकिन यह हर ब्रीड के लिए सही नहीं होता। कुछ कुत्तों के बाल उन्हें गर्मी से बचाने का काम भी करते हैं। इसलिए हेयरकट से पहले एक्सपर्स की सलाह लेना जरूरी है।
गर्मियों में कुत्तों को ज्यादा बार ब्रश करना चाहिए ताकि उनके बालों में हवा गुजरती रहे और उन्हें गर्मी से राहत मिलती रही। इसके साथ ही, उन्हें ठंडे पानी से नहलाना और हाइड्रेशन का ध्यान रखना जरूरी है। अगर पार्लर में ग्रूमिंग कराते हैं तो गर्मियों में एक सेशन का खर्च आमतौर पर 800 से 3000 रुपये तक हो सकता है, जो ब्रीड, साइज और सर्विस पर निर्भर करता है। घर पर ग्रूमिंग करने में खर्च कम आता है लेकिन इसके लिए सही प्रोडक्ट्स और समय देना जरूरी होता है।
ग्रूमिंग में किन चीजों का रखें ध्यान?
कुत्ते की ग्रूमिंग करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहले, हमेशा डॉग-फ्रेंडली शैम्पू और प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें। इंसानों के लिए बने शैम्पू कुत्तों की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ब्रशिंग करते समय धीरे-धीरे और प्यार से करें ताकि कुत्ते को दर्द न हो इस दौरान ध्यान रखें की कुत्ता कई बार असहज भी हो सकता है। अगर बाल बहुत उलझे हुए हैं, तो उन्हें जबरदस्ती खींचने के बजाय धीरे-धीरे सुलझाएं। नाखून काटते समय सावधानी रखें, क्योंकि ज्यादा अंदर तक काटने पर खून निकल सकता है और कुत्ता आप पर अटैक भी कर सकता है।
क्या ग्रूमिंग से व्यवहार पर भी असर पड़ता है?
जी हां, ग्रूमिंग का असर कुत्ते के व्यवहार पर भी पड़ता है। जब कुत्ता साफ और आरामदायक महसूस करता है, तो उसका मूड भी अच्छा रहता है। नियमित ग्रूमिंग से कुत्ता तनावमुक्त रहता है और ज्यादा एक्टिव व खुश नजर आता है। इसके अलावा, ग्रूमिंग के दौरान अगर मालिक खुद समय देता है, तो कुत्ता ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। इससे उसके अंदर विश्वास बढ़ता है और वह ज्यादा फ्रेंडली बनता है।
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क्या हर उम्र में जरूरी है ग्रूमिंग?
कुत्ते की उम्र चाहे जो भी हो, ग्रूमिंग हर स्टेज पर जरूरी होती है। पपी (छोटे कुत्ते) को शुरू से ही ग्रूमिंग की आदत डालनी चाहिए ताकि वह बड़े होकर इससे डरें नहीं। वहीं बूढ़े कुत्तों के लिए ग्रूमिंग और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि उनकी त्वचा ज्यादा संवेदनशील हो जाती है और उन्हें ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। कुत्तों की ग्रूमिंग कोई लग्जरी नहीं, बल्कि उनकी सेहत के लिए जरूरी जरूरत है। खासकर गर्मियों में कुत्तों को नियमित तौर पर ग्रमिंग की जरूरत होती है।
