भारतीय टीम अगले महीने 2 मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए श्रीलंका जा रही है। इस सीरीज का पहला मैच 23 अगस्त से गॉल में खेला जाएगा। दूसरे मुकाबले की मेजबानी कोलंबो का सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) ग्राउंड करेगा। टीम इंडिया 9 साल बाद टेस्ट सीरीज खेलने श्रीलंका जा रही है। उसने 2017 में श्रीलंका के आखिरी दौरे पर 3 मैचों की टेस्ट सीरीज को 3-0 से अपने नाम किया था। इससे पहले भारतीय टीम ने 2015 में श्रीलंकाई टीम को उसके घर में 2-1 से मात दी थी। विराट कोहली की कप्तानी में टीम की यह पहली फुल टेस्ट सीरीज थी, जिसमें उन्होंने दुनिया को बता दिया था कि भारतीय क्रिकेट के लिए आने वाला साल कैसे रहने वाला है।

हार के साथ दौरे की हुई शुरुआत

2015 के दौरे की शुरुआत गॉल में हुई थी। 5 गेंदबाजों के साथ उतरी भारतीय टीम ने श्रीलंका की पहली पारी 183 पर समेट दी। रविचंद्रन अश्विन ने 6 विकेट झटके। जवाब में शिखर धवन (134) और कोहली (103) ने शतकीय पारियां खेली, जिससे टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी में 375 रन बनाए और 192 रन की विशाल बढ़त हासिल की। इसके बाद अश्विन और अमित मिश्रा ने पहले दो ओवर में ही श्रीलंकाई सलामी जोड़ी को पवेलियन भेज दिया। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका का स्कोर 5/2 था। नाइट-वॉचमैन धम्मिका प्रसाद के साथ कुमार संगाकारा क्रीज पर थे।

 

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भारत ने तीसरे तीन के पहले ही ओवर में धम्मिका को आउट कर श्रीलंका का स्कोर 3 विकेट के नुकसान पर 5 रन कर दिया। संगाकारा (40) और कप्तान एंजेलो मैथ्यूज (39) ने चौथे विकेट के लिए 87 रन की साझेदारी कर श्रीलंका की वापसी कराई लेकिन दोनों लगातार ओवरों में अश्विन और अमित मिश्रा का शिकार बन गए। 100 रन के अंदर श्रीलंका की आधी टीम सिमट चुकी थी और भारतीय टीम पारी के अंतर से जीत हासिल करती दिख रही थी लेकिन दिनेश चांदीमल ने बाजी पलट दी।

 

चांदीमल ने 169 गेंद में 162 रन की यादगार पारी खेल श्रीलंका को 367 रन के स्कोर तक पहुंचा दिया। लाहिरू थिरिमाने (44) और जेहान मुबारक (49 रन) ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत को 176 रन का टारगेट मिला, जो उतना मुश्किल नहीं लग रहा था लेकिन रंगना हेराथ (7 विकेट) ने ऐसा कहर बरपाया कि टीम इंडिया 112 पर ही ऑलआउट हो गई। कोहली की कप्तानी वाली टीम जीत की स्थिति में आने के बाद 63 रन से मुकाबला गंवा बैठी।

 

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भारत की जोरदार वापसी

टीम इंडिया ने 1993 के बाद से श्रीलंका में कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीती थी। गॉल टेस्ट में हार के बाद माना जा रहा था कि भारतीय टीम एक बार फिर श्रीलंका से खाली हाथ ही लौटेगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि घर से बाहर टीम इंडिया किसी टेस्ट सीरीज में 0-1 से पिछड़ने के बाद कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाई थी। हालांकि कोहली एंड कंपनी के इरादे कुछ और ही थे। भारत ने कोलंबो के पी सारा ओवल में दूसरा टेस्ट 278 रन से जीतकर सीरीज में जोरदार वापसी की। यह संगाकारा का फेयरवेल टेस्ट भी था।

 

अब सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला SSC ग्राउंड पर खेला जाना था। पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने पर चेतेश्वर पुजारा (नाबाद 145) के शतक की बदौलत भारत ने 312 रन बनाए। इसके बाद ईशांत शर्मा (5 विकेट) की अगुवाई में गेंदबाजों ने कमाल करते हुए श्रीलंका की पहली पारी 201 पर समेट दी। टीम इंडिया ने 111 रन की मजबूत बढ़त लेने के बाद अपनी दूसरी पारी में 274 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 386 रन का मुश्किल टारगेट रखा, जिसके जवाब में मेजबान टीम 268 रन पर धराशायी हो गई। भारतीय टीम ने 117 रन से मुकाबला अपने नाम कर सीरीज पर 2-1 से कब्जा जमा लिया।

 

अश्विन ने सीरीज में सबसे ज्यादा 21 विकेट झटके। उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज के अवॉर्ड से नवाजा गया। भारत की ओर से कोहली (233) सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। हालांकि रन से ज्यादा उनकी आक्रामक कप्तानी बड़ा फैक्टर साबित हुई। वह सीरीज में पिछड़ने के बाद भी 5 गेंदबाजों के साथ उतरने के अपने फैसले पर कायम रहे और दिखाया कि नई टीम इंडिया वर्ल्ड क्रिकेट पर राज करने वाली है।