अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले रोहित शर्मा से अचानक वनडे टीम की कप्तानी छीन ली गई थी। शुभमन गिल टेस्ट के बाद वनडे टीम के भी कप्तान बना दिए गए। मैनेजमेंट के इस फैसले से हर कोई हैरान रह गया। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ ही महीनों पहले रोहित की कप्तानी में टीम इंडिया ने चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। इससे पहले उनकी अगुवाई में भारतीय टीम टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनी थी।

 

9 महीने के अंदर भारत को दो-दो ICC ट्रॉफी जिताने के बाद माना जा रहा था कि रोहित 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक कप्तान रहेंगे लेकिन चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने ऑस्ट्रेलिया दौरे की वनडे टीम चुनने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया किया कि इस फॉर्मेट में अब शुभमन गिल कप्तानी करेंगे।

 

इस फैसले को लिए करीब 100 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी भी सवाल उठते रहते हैं कि रोहित को कप्तानी से क्यों हटाया गया? इस बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा है कि भले ही फैसले का ऐलान अगरकर ने किया लेकिन इसमें गौतम गंभीर की भी भूमिका रही होगी।

 

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'अगरकर के कंधे पर रखकर बंदूक चलाया गया'

मनोज तिवारी ने स्पोर्ट्स टूडे से कहा, 'अजीत अगरकर मजबूत शख्सियत हैं और खुद निर्णय लेने में सक्षम हैं। हालांकि हमें यह ध्यान रखना होगा कि पर्दे के पीछे कई चीजें होती हैं और हो सकता है कि उनके कंधे पर रखकर बंदूक चलाई गई हो। माना कि फैसला चीफ सेलेक्टर ने लिया हो लेकिन इसमें कोच की इनपुट भी जरूर रही होगी। इतना बड़ा फैसला अकेले नहीं लिया जा सकता।'

 

उन्होंने आगे कहा, 'मैंने रोहित के साथ खेला है। उसको हटाया जाना काफी असम्मानजनक लगा। इतने बड़े खिलाड़ी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था।'

 

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क्रिकेटिंग लॉजिक पर भी उठाया सवाल

मनोज तिवारी ने कहा कि रोहित के 2027 वर्ल्ड कप में खेलने को लेकर संदेह ही नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी क्षमता पर सवाल उठाना बेवकूफी है। मनोज तिवारी ने कहा, 'जब कोई खिलाड़ी वनडे में तीन-तीन दोहरे शतक लगा चुका हो और सेल्फलेस माइंडसेट से खेलता हो, जैसे कि उसने 2023 में भी किया, तो आप उस पर सवाल नहीं उठा सकते। उसे कप्तानी से हटाना सिर्फ क्रिकेटिंग लॉजिक के तर्क से जायज नहीं ठहराया जा सकता।'