चंडीगढ़ के एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की 24 महिला स्टाफ ने मिलकर अपने ही एक पुरुष शिक्षक के खिलाफ आवाज उठाई है। महिलाओं का कहना है कि इस शिक्षक की वजह से स्कूल का माहौल असुरक्षित और अपमानजनक हो गया है। उनका आरोप है कि स्कूल में उन्हें लगातार असहज महसूस कराया जा रहा था।
इस पूरे मामले को लेकर महिलाओं ने अब आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ यानी POSH कानून के तहत की गई है। अब इस मामले की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
स्कूल की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) को सौंपी गई इस शिकायत में आरोपी शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिला स्टाफ का कहना है कि आरोपी शिक्षक का व्यवहार लंबे समय से आक्रामक और डराने वाला रहा है। वह न केवल महिला सहकर्मियों के साथ बदतमीजी करता है, बल्कि विरोध करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां भी देता है। इस सामूहिक शिकायत के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
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महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता महिलाओं ने अपनी रिपोर्ट में शिक्षक के आक्रामक व्यवहार की पूरी फेहरिस्त शेयर की है। उनका आरोप है कि शिक्षक अक्सर मामूली बातों पर बहस करता है और महिला कर्मचारियों पर जोर-जोर से चिल्लाता है। महिलाओं ने फरवरी की एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया है, जब आरोपी शिक्षक कथित तौर पर उनके बेहद करीब आकर खड़ा हो गया और डराने वाले अंदाज में धमकियां दीं। महिलाओं का कहना है कि इस व्यवहार के कारण वे स्कूल में खुद को असुरक्षित और अपमानित महसूस करती हैं।
महिला कर्मचारियों ने विभाग को दो टूक चेतावनी दी है कि वे अब इस मानसिक उत्पीड़न को और बर्दाश्त नहीं करेंगी। उन्होंने मांग की है कि जांच के दौरान उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए और आरोपी को तुरंत उनके कार्यक्षेत्र से दूर रखा जाए। महिलाओं ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर ICC या शिक्षा विभाग ने जल्द ही कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की तो वे इस मामले को लेकर सीधे पुलिस के पास जाएंगी और आपराधिक मामला दर्ज कराएंगी।
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दो कमेटियों के बीच फंसा मामला
चंडीगढ़ के स्कूल शिक्षा निदेशक नीतीश सिंगला ने बताया कि स्कूल की आंतरिक समिति (ICC) ने अपनी रिपोर्ट दी थी लेकिन वह किसी स्पष्ट नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। सिंगला ने कहा, 'चूंकि इंटरनल रिपोर्ट निर्णायक नहीं थी, इसलिए मैंने मामले को जिला स्तर की एक अन्य समिति के पास भेज दिया है। हम दोनों पक्षों की सुनवाई कर रहे हैं और जल्द ही अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।'
नियम क्या कहते हैं?
POSH के नियमों के मुताबिक, सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायतों की जांच संस्थान के अंदर बनी इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) ही करती है। वहीं, जिला स्तर पर लोकल कंप्लेंट्स कमेटी (LCC) आमतौर पर तब बनाई जाती है जब किसी संस्था में ICC मौजूद न हो या फिर शिकायत सीधे एम्प्लॉयर के खिलाफ हो। ऐसे में इस केस में अलग से दूसरी कमेटी बनाने की जरूरत क्यों पड़ी, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
