छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के अधिकारियों ने बताया कि गोगुंडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 29 नक्सलियों ने बुधवार को सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, सरेंडर करने वालों में गोगुंडा पंचायत में सक्रिय आदिवासी किसान मजदूर संगठन का अध्यक्ष पोड़ियाम बुधरा भी शामिल है, जिसके सिर पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इससे पहले 9 जनवरी को दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। राज्य में साल 2025 से अब तक 1500 से ज्यादा नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।

 

अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले माओवादियों में सुकमा जिले से जुड़े नक्सलियों की संख्या ज्यादा है। यह सरेंडर गोगुंडा क्षेत्र में सुरक्षा शिविर की स्थापना के कारण संभव हो पाया है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति–2025” के तहत सरेंडर करने वाले माओवादियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी।

 

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सुरक्षा शिविर की वजह से हुआ सरेंडर?

 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा शिविर की स्थापना के बाद इलाके में माओवादी गतिविधियों में काफी कमी आई है। सुरक्षा शिविरों के कारण माओवादियों के ठिकानों को ध्वस्त किया गया और क्षेत्र में लगातार अभियान चलाए गए। इसके चलते माओवादी संगठन पर सरेंडर का दबाव बढ़ा, जिसके चलते माओवादियों ने सरेंडर का रास्ता अपनाया।

 

माओवादियों के सरेंडर के बाद क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। साथ ही अब स्थानीय लोग सरकार की विभिन्न कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ उठा पा रहे हैं, जिससे शासन-प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।

 

खात्मे की ओर नक्सलवाद

 

इस घटना ने नक्सल विरोधी अभियान को और मजबूत किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने डेडलाइन तय की है कि मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा। इसी के चलते नक्सल प्रभावित तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं। बीते एक साल में दर्जनों नक्सली एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं और हजारों नक्सलियों ने सरेंडर करके शांति का रास्ता अपना लिया है।