संजय सिंह, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार और अपराध पर जनता से जीरो टॉलरेंस का वादा करते रहे हैं, लेकिन जटिल कानूनी प्रक्रिया के चलते भ्रष्ट अधिकारियों को सजा नहीं मिल पाती है। कई बार तो ऐसा देखा गया है कि भ्रष्टाचार में पकड़े गए अधिकारी सेवानिवृत या दिवंगत हो जाते हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चलती रहती है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बीते वर्ष 122 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। अब कानूनी दांवपेंच में मामला कहीं अटके नहीं, इसके खातिर दो कोषांग का गठन किया गया है, ताकि भ्रष्ट अधिकारियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके।

कैसे आएगी सजा में तेजी?

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार का कहना है कि आरोपियों को रंगेहाथ तो पकड़ा जाता है, लेकिन सजा दिलाने में काफी देरी हो जाती है। अब स्पीडी ट्रायल सेल का गठन विभाग के अंदर किया गया है। इस सेल का काम कागजी प्रक्रिया को पूरा करना और गवाहों और साक्ष्यों को समय पर न्यायालय में पेश करना है। 

 

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दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि जिन कर्मियों को भ्रष्टाचार के मामले में पकड़ा जाता है, उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति संबंधित विभाग से लेनी होती है। अनुमति लेने में वर्षों का समय बीत जाता है। भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ समय पर विभागीय कार्रवाई भी शुरू नहीं हो पाती है। इस कारण कानून का भय भ्रष्टाचारियों के मन में पैदा नहीं हो पा रहा है।

 

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101 लोग रंगेहाथ पकड़ाए 

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बीते बर्ष 101 लोगों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा। 15 लोगों के ऊपर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया। 7 लोगों के खिलाफ पद का दुरुपयोग कर संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। पिछले 25 वर्षों में हर साल 72 से 74 मामले दर्ज किए हैं, लेकिन साल 2025 में 122 मामले सामने आए। घूसखोरी के मामले में 106 लोगों को पकड़ा गया। पकड़े गए लोगों में छह महिला पदाधिकारी और छह बिचौलिए भी हैं। सबसे अधिक कार्रवाई दिसंबर महीने में हुई। दिसंबर महीने में भ्रष्टाचार से जुड़े 20 मामले दर्ज किए गए।