महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। 19 जनवरी को उल्हासनगर के नगर निगम चुनाव में प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) से जीत हासिल करने वाले दो पार्षदों ने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन दे दिया है। इससे शिवसेना की राजनीतिक स्थिति और ज्यादा मजबूत हो गई है।
महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव 15 जनवरी को कराए गए थे। उल्हासनगर में नगर निगम की कुल 78 सीटें हैं। यहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना (शिंदे गुट) ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि, गठबंधन में चुनाव लड़ने के बावजूद भी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंदरखाने यह बात चल रही थी कि बीजेपी या शिवसेना में किसी सीटें ज्यादा आती हैं। चुनाव परिणामों में बीजेपी ने 37 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि शिवसेना 36 सीटें पर ही जीत हासिल कर पाई। वहीं, प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) ने 2 सीटों पर जीत हासिल की।
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वीबीए से सुरेखा सोनावणे और विकास खरात को जीत मिली। हालांकि, जीत के 4 दिन बाद ही दोनों पार्षदों ने वीबीए छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने का एलान कर दिया। इसके बाद शिवसेना और बीजेपी के बीच बाज़ी पलट गई। पहले जहां उल्हासनगर नगर निगम में बीजेपी बहुमत के करीब थी, वहीं शिवसेना की सीटें बीजेपी की तुलना में एक ज्यादा हो गई और शिवसेना बहुमत के बिल्कुल करीब पहुंच गई। शिवसेना के पास अब 38 सीटें हो गई हैं, जबकि बीजेपी के पास 37 सीटें ही रहीं।
हालांकि, दोनों पार्षदों ने अपनी आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि वे अपने-अपने वार्ड में विकास कर सकें और दलित बस्तियों में योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू कर सकें। गौरतलब है कि बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिवसेना ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इसी कारण जिन सीटों पर बीजेपी ने उम्मीदवार उतारे थे, वहां शिवसेना ने प्रत्याशी नहीं खड़े किए थे।
शिंदे के घर पर हुई बैठक
सूत्रों के मुताबिक रविवार रात मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आवास पर एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में शिवसेना के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जिनमें विधायक डॉ. बालाजी किनीकर, पूर्व महापौर सुनील चौधरी और पार्टी प्रवक्ता राहुल लोंढे शामिल थे। इसी बैठक में वीबीए पार्षद सुरेखा सोनावणे और विकास खरात से बातचीत हुई। बातचीत के बाद दोनों पार्षदों ने शिवसेना में शामिल होने का फैसला लिया। इसके बाद दोनों पार्षदों ने लिखित रूप में यह घोषणा की कि वे बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से शिवसेना पार्टी में शामिल हो रहे हैं।
इससे पहले भी इस उद्धव ठाकरे के बयान के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि शिवसेना के पार्षद टूटकर शिवसेना (यूबीटी) में शामिल हो सकते हैं। इसीलिए एकनाथ शिंदे ने अपने पार्षदों को एक जगह होटल में इकट्ठा कर लिया था। हालांकि, किसी को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वीबीए के पार्षद टूटकर शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। जाहिर है यह घटना बीजेपी और शिवसेना के बीच खींचतान का कारण बन सकती है क्योंकि एकनाश शिंदे इससे पहले बयान दे चुके हैं कि मेयर महायुति का होना चाहिए।
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BMC चुनाव में टूटा रिकॉर्ड
बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। 227 सीटों वाले बीएमसी चुनाव में दोनों पार्टियों ने मिलकर 118 सीटों पर कब्जा जमा लिया। यह जीत बीजेपी के लिए काफी खास मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार बीजेपी का कोई उम्मीदवार मुंबई का मेयर बनने वाला है।
इस चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा 89 सीटों पर जीत मिली है, जबकि एकनाथ शिंदे के वाली शिवसेना ने 29 सीटों पर कब्जा जमाया है। वहीं कांग्रेस इस चुनाव में सिर्फ 1 सीट पर ही सिमट कर रह गई है।
