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'मेयर तो महायुति का ही होगा,' BJP पर दबाव या नई सियासत, क्या सोच रहे शिंदे?

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि होटल ताज को एकनाथ शिंदे ने जेल में तब्दील कर दिया है। वह नहीं चाहते हैं कि मेयर, बीजेपी का बने। अब नई सुगबुगाहट शुरू हुई है।

Eknath Shinde

शिवसेना अध्यक्ष एकनाथ शिंदे। Photo Credit: PTI

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नवनिर्वाचित शिवसेना पार्षदों से मुलाकात की है। यह मुलाकात बहुप्रतीक्षित थी। शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया है कि एकनाथ शिंदे नहीं चाहते हैं कि BMC का मेयर भारतीय जनता पार्टी (BMC) से चुना जाए। एकनाथ शिंदे ने जवाब में कहा है कि मेयर को महायुति का ही होगा। उन्होंने यह नहीं कहा है कि मेयर बीजेपी का होगा। यह चुप्पी, विपक्ष को अटकलें लगाने का मौका दे रही है।

चर्चा यह भी है कि शिवसेना अपना मेयर चाहती है। अब तक परंपरा रही है कि BMC में मेयर शिवसेना का रहा है। एकनाथ शिंदे, खुद को बाल ठाकरे का राजनीतिक उत्तराधिकारी मानते हैं, इसलिए चाहते हैं कि शिवसेना की मेयर हो, भले ही बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी क्यों न हो। 

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पार्षदों से मिलकर क्या बोले एकनाथ शिंदे?

एकनाथ शिंदे, अध्यक्ष, शिवसेना:-
मुंबई में महायुति का मेयर होगा। कल्याण-डोम्बिवली जैसे पड़ोसी शहरों में भी महायुति के मेयर होंगे। शिवसेना निडर है। होटल में नए पार्षदों को आपस में बातचीत करने के लिए एक साझा मंच मिलेगा। मैं उनसे मिलना चाहता था।

'महायुति का ही होगा मेयर'

एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पार्षदों से मुलाकात के बाद दावा किया है कि मेयर महायुति का ही होगा। महाराष्ट्र में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स अटकलें इसलिए शुरू हुईं हैं क्योंकि शिवसेना ने जीते हुए 29 पार्षदों को होटल ताज में ठहरा दिया है। विपक्ष का एक खेमा लगातार कह रहा है कि अगर मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का है तो फिर बीएमसी में मेयर शिवसेना का होना चाहिए। बीजेपी अभी ऐसा नहीं चाहती है। 

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29 पार्षदों के साथ एकनाथ शिंदे।

क्यों शिवसेना के दबाव की अटकलें लग रहीं हैं?

नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद शिवसेना के 29 पार्षदों को एक होटल में रखा गया है। महायुति नहीं चाहती है कि किसी भी तरह से पार्षद दूसरे खेमे में जाएं। जोड़तोड़ से उनका भी मेयर बन सकता है। एकनाथ शिंदे ने विपक्ष की इन अटकलों पर विराम तो लगा दिया है लेकिन अभी तक यह नहीं बताया है कि मेयर बीजेपी का होगा या शिवसेना का। 

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BMC में क्या समीकरण बन रहे हैं?

BMC चुनाव में महायुति गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। BJP को 89 सीटें और शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं हैं। बहुमत के लिए 114 जरूरी है, गठबंधन के पास 4 ज्यादा हैं। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 65 और MNS को 6 सीटें मिलीं। मेयर पद को लेकर अब खींचतान शुरू हो गई है। 

एकनाथ शिंदे गुट ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में ठहराया है। कई पार्षद पहली बार चुने गए हैं। शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि यह रिसॉर्ट पॉलिटिक्स है और पार्षदों को बीजेपी की पहुंच से बाहर रखा जा रहा है, जिससे शिवसेना BJP के साथ मेयर पद मांगे या ज्यादा अहम हिस्सेदारी मांगे। 

शिवसेना क्यों चाहती है?

शिवसेना नेता संजय गोयल ने एक बयान में कहा, 'शिवसेना डरने वाली पार्टी नहीं है। मेयर पद हर सत्ताधारी पार्टी चाहती है। बाल ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष 23 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है, इसलिए इस बार शिवसेना का मेयर होना चाहिए। 

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पार्षदों को क्या निर्देश दे गए एकनाथ शिंदे?

एकनाथ शिंदे ने नवनिर्वाचित पार्षदों से तुरंत काम करने और विकासवादी राजनीति पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने पगड़ी-फ्री मुंबई जैसी योजनाओं पर ध्यान देने की बात कही है। 

ढाई साल के फॉर्मूले में कितना दम है?

विपक्ष का एक धड़ा दावा कर रहा है कि शिवसेना का मेयर 2.5 साल रहेगा, बीजेपी का 2.5 साल। एकनाथ शिंदे, बीजेपी से ऐसा ही चाहते हैं। मुंबई की बीएमसी का बजट, कई राज्यों के बजट से ज्यादा है, इसलिए गठबंधन के दोनों सहयोगियों की नजर इस पर है। बाल ठाकरे का शताब्दी वर्ष है, इसलिए शिवसेना अपना मेयर चाहती है। शिवसेना के 23 मेयर अब तक चुने जा चुके हैं। उद्धव ठाकरे गुट चुनौती दे रहा है कि क्या शिवसेना की यह परंपरा एकनाथ शिंदे काम रख पाएंगे। मेयर चुनावों को लेकर अभी सियासी ड्रामा बाकी है।

 


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