शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि ताज होटल में एकनाथ शिंदे ने जीते हुए पार्षदों को बंदी बनाकर रखा है। एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की सरकार है, इन्हें किडनैप करके रखना कानूनी तौर पर गलत है। उन्होंने कहा कि सिर्फ इस डर से कि कहीं पार्षद चले न जाएं, उन्हें बंदियों की तरह रखा गया है। यह अलोकतांत्रिक है।
संजय राउत ने हा, 'इस गठबंधन से आए कॉर्पोरेटर्स को इस डर से कि कोई उन्हें किडनैप कर लेगा, धमकाएगा या नुकसान पहुंचाएगा, उन्हें ताज होटल में बंदी बनाकर रखा गया है। एकनाथ शिंदे ने ताज होटल को येरवडा या ऑर्थर रोड जेल बना दिया है। उन्हें तुरंत उन 28 या 25 लोगों को रिहा करना चाहिए, जिन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।'
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संजय राउत, सांसद, शिवसेना (UBT):-
जिन लोगों को कैद करके रखा गया है, उन्हें रिहा करना चाहिए। यह उनके अधिकारों पर हमला है। मुख्यमंत्री को पुलिस को आदेश देना चाहिए ताज होटल कैदखाना बना है, उसके तालों को तोड़ दो, वहां बंधकों को रिहा करो। एकनाथ शिंदे भी नहीं चाहते हैं बीजेपी का मेयर बने।
मुंबई में शुरू रिसॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू
मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजे सामने फिर रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की वापसी हो गई है। महायुति गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की है, जिसमें बीजेपी ने 89 सीटें जीतीं और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। दोनों मिलकर 118 सीटों पर पहुंच गए हैं, जो 227 सदस्यीय सदन में बहुमत के आंकड़े 114 से काहीं ज्यादा हैं। ठाकरे परिवार के दशकों पुराने गढ़ को तोड़ दिया गया है। अब असली राजनीतिक खेल मेयर पद को लेकर शुरू हो गया है।
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संजय राउत ने ऐसा क्यों कहा है?
संजय राउत ने कहा है कि एकनाथ शिंदे नहीं चाहते मेयर बीजेपी का हो। पहली बार मुंबई को बीजेपी का मेयर मिलने जा रहा है। एकनाथ शिंदे खुद को बाल ठाकरे का सियासी वारिस बताते हैं। एकनाथ शिंदे गुट ने पार्षदों को दल बदल से बचाने के लिए अभी से रणनीति तैयार कर ली है।
सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में शिफ्ट किया गया है। माना जा रहा है कि विपक्षी दल हॉर्स ट्रेडिंग न करने पाए, इसलिए यह फैसला लिया गया है। अगर विपक्ष एकजुट हो जाए तो भी उनके पास अधिकतम 106 सीटें ही होंगी। यह बहुमत के आंकड़े से 8 कम हैं लेकिन शिंदे गुट कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है।
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बीजेपी से टेंशन है?
विपक्ष कह रहा है कि एकनाथ शिंदे अपना मेयर चाहते हैं। बीजेपी में इसे लेकर तनाव की बात कही जा रही है। शिंदे गुट मेयर पद पर अपना दावा मजबूत करना चाहता है। उद्धव ठाकरे ने कहा है कि चुनाव खत्म हो गए, लेकिन असली राजनीति अभी बाकी है। उनकी शिवसेना (यूबीटी) ने सामना संपादकीय में चुनौती दी है कि क्या मुंबई को 23 मराठी मेयर देने वाली शिवसेना की परंपरा जारी रह पाएगी।
उद्धव ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि उनका सपना शिवसेना (यूबीटी) का मेयर बनाना है और अगर भगवान ने चाहा तो यह सपना पूरा होगा। उन्होंने शिंदे पर तंज कसते हुए कहा कि जो एक बार पार्टी छोड़ सकते हैं, वे दोबारा भी ऐसा कर सकते हैं।
मेयर पद को लेकर महायुति में खींचतान साफ दिख रही है। बीजेपी अपने पार्षद को मेयर बनाकर राजनीतिक संदेश देना चाहती है, जबकि शिंदे पर दबाव है कि मुंबई में दशकों से शिवसेना का मेयर रहा है, इसलिए इस बार भी यह पद उनके पास रहना चाहिए।