राजस्थान के नागौर जिले में किसान पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे थे। इस आंदोलन को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल का समर्थन मिला था। उन्होंने किसानों के साथ खड़े रहते हुए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दी थी लेकिन अब खबर आ रही है कि वह मान गए हैं। 13 जनवरी को हनुमान बेनीवाल हजारों किसानों के साथ जयपुर की ओर रवाना हुए थे। किसानों की मांगों के समर्थन में उन्होंने चक्का जाम और रेलवे ट्रैक जाम करने का ऐलान किया था।

 

इसी बीच रात करीब 11:30 बजे अजमेर रेंज के आईजी राजेंद्र सिंह, नागौर के जिलाधिकारी अरुण कुमार और एसपी मृदुल कच्छावा उनसे बातचीत के लिए पहुंचे। हनुमान बेनीवाल को बातचीत के लिए होटल में बुलाया गया। लंबी चर्चा के बाद उन्होंने आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा कर दी।

 

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किसानों की मांगें

किसानों ने सरकार से 6 मांगे की थी जिसे महापड़ाव कहा जा रहा है। किसानों की मांगे थी- 

  • बजरी माफियाओं खिलाफ सख्त कार्रवाई और अवैध खनन पर रोक
  • किसानों के बकाया बीमा क्लेम का तत्काल भुगतान
  • पुष्कर-मेड़ता-रास रेलवे लाइन के काम में तेजी
  • हाई टेंशन लाइन की बढ़ी हुई दरों से राहत
  • किसानों पर दर्ज राजनीतिक मुकदमों को रद्द करना

 

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बेनीवाल का समर्थन

13 जनवरी को रियांबड़ी में पिछले 8 दिनों से चल रहे किसानों के आंदोलन में सांसद शामिल हुए। उन्होंने प्रशासन को किसानों की मांगें मानने के लिए शाम 4 बजे तक का अल्टीमेटम दिया था। तय समय तक सुनवाई नहीं होने पर वे 11 किलोमीटर दूर NH-59 नागौर-अजमेर हाईवे की ओर रवाना हो गए। प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए हाईवे पर बेरिकेडिंग कर रखी थी और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था। हालात को देखते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल का काफिला बाद में जयपुर की ओर मुड़ गया। 

मुख्यमंत्री पर बोला हमला

इससे पहले बेनीवाल ने कहा था कि उन्होंने बजरी माफिया पर तो कार्रवाई कर दी लेकिन जनता ने आरएलपी को वोट न देकर उसका इलाज कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछली बार राजस्थान की जनता ने पार्टी को एक भी वोट नहीं दिया। अगर समय रहते लोगों ने समर्थन दिया होता और आज उनके 5, 7 या 10 विधायक होते, तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा या राज्यपाल के अभिभाषण देने की हिम्मत नहीं होती। बेनीवाल ने यह भी कहा कि वह उस अभिभाषण को फाड़कर फेंक देते, जैसा वह पहले 11 बार कर चुके हैं।