असम के चिरांग जिले में शुक्रवार को जंगल में अतिक्रमण के आरोप में 25 लोगों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। इस घटना में 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए, जिनमें 15 पुलिसकर्मी और वन विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

 

पुलिस के अनुसार, गुरुवार को रुणिखाता वन क्षेत्र (भारत-भूटान सीमा के पास) में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने 25 स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया था। अगले दिन शुक्रवार सुबह 200 से ज्यादा स्थानीय लोग रुणिखाता वन कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए और इन लोगों को छोड़ने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।

 

यह भी पढ़ें: वोटिंग प्रतिशत बढ़ने या घटने से किसे हुआ फायदा? पुराने ट्रेंड और डेटा से समझिए

 

चिरांग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ध्रुबा बोरा (जो खुद भी घायल हुए) ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पहले वन कार्यालय पर हमला किया, अफवाहें फैलाईं, फिर कार्यालय और गाड़ियों में आग लगा दी और पथराव शुरू कर दिया। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और हवा में गोली चलानी पड़ी। इस दौरान 15 पुलिस और वन अधिकारी घायल हुए। प्रदर्शनकारियों में भी कई लोग घायल हुए।

क्या है आरोप

प्रदर्शन करने वाले आदिवासी लोगों का कहना है कि वन विभाग केवल आदिवासी लोगों पर ही कार्रवाई कर रहा है। वे कहते हैं, 'अगर जंगल साफ करना गलत है तो बोडो समुदाय के लोग भी तो वही कर रहे हैं, उन पर क्यों नहीं कार्रवाई हो रही? यह भेदभाव है।'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ बदसलूकी की गई और महिलाओं के साथ पुलिस ने बदतमीजी की। इसी गुस्से में प्रदर्शन हिंसक हो गया।

क्या है स्थिति?

यह प्रदर्शन ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AASAA) और ऑल संथाल स्टूडेंट्स यूनियन (ASSU) द्वारा आयोजित किया गया था। दोनों संगठनों ने पूरे बोडोलैंड क्षेत्र में बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है और स्वतंत्र जांच की मांग की है।


पुलिस अधीक्षक बोरा ने बताया कि अब स्थिति नियंत्रण में है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं चिरांग और कोकराझार जिलों में बंद कर दी गई हैं।

 

यह भी पढ़ें: असम में अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर बंपर वोटिंग, केरल में टूटा पिछला रिकॉर्ड

सरकार ने क्या कहा?

बोंगाईगांव के पुलिस अधीक्षक नुमल महत्ता ने कहा, 'हम बातचीत से मुद्दे का समाधान करना चाहते हैं, लेकिन अगर कोई कानून हाथ में लेगा तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।' पुलिस ने कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे और जांच चल रही है।