उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक बड़ा हादसा टल गया। शुक्रवार को अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) के कार्यालय की सीढ़ियां अचानक भरभराकर गिर गईं। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हादसे के समय कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सीढ़ियां गिरते ही पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, इस हादसे ने सरकारी भवनों की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब शहर के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता और मेयर महंत गिरीश पति त्रिपाठी भी ADA दफ्तर में मौजूद थे। दोनों एक अहम बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। बैठक खत्म होने के कुछ ही मिनट बाद सीढ़ियां अचानक भरभराकर गिर गईं। जानकारी के मुताबिक, ADA दफ्तर में कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी संचालकों के साथ एक बैठक चल रही थी। इसमें बड़ी संख्या में कोचिंग संचालक और संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
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निर्माण गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल
यह हादसा इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) की जिम्मेदारी शहर में भवन निर्माण की गुणवत्ता की जांच करना और निर्माण मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। ऐसे में उसी विभाग के कार्यालय की सीढ़ियां गिरने से उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्राधिकरण अपने ही भवन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है तो शहर के अन्य निर्माण कार्यों की निगरानी कितनी प्रभावी होगी, इस पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
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सचिव ने नहीं दिया स्पष्ट जवाब
हादसे के बाद पत्रकारों ने ADA के सचिव राजेश मिश्रा से सीढ़ियां गिरने के कारण और जिम्मेदारी को लेकर सवाल किए। हालांकि, उन्होंने इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। फिलहाल घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि सीढ़ियां तकनीकी खामी, निर्माण में लापरवाही या किसी अन्य वजह से गिरीं।


