स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) इन दिनों पूरे देश में चर्चा में है। पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी राज्यों में यह बेहद अहम मुद्दा भी है। अब पश्चिम बंगाल सरकार ने ऐलान किया है कि SIR के दौरान जिन लोगों की मौत हो गई, उनके परिवार के लोगों को होमगार्ड की नौकरी दी जाएगी। गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में पश्चिम बंगाल सरकार ने यह फैसला लिया है।
फैसले के तहत एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जान गंवाने वाले 56 लोग और विकलांग होने वाले पांच लोगों के घरवालों को नौकरी दी जाएगी। इन 56 लोगों में 19 बूथ लेवल अफसर यानी बीएलओ के नाम भी शामिल हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ममता बनर्जी सरकार के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। ममता बनर्जी शुरुआत से ही एसआईआर का विरोध कर रही हैं और इसके खिलाफ केस लड़ने भी खुद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं।
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एसआईआर के तहत पूरे देश के कई राज्यों में वोटर लिस्ट अपडेट कराई जा रही है। अलग-अलग राज्य में अलग-अलग साल की लिस्ट को आधार मानकर लोगों के लोगों से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। कई राज्यों में अब तक लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर किए जा चुके हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोग एसआईआर में पहचान पत्र के तौर पर 10वीं का प्रवेश पत्र भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
क्या है ममता सरकार का प्लान?
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अब तक कुल 56 लोग प्रभावित हुए हैं। ये 56 लोग ऐसे हैं, जो या तो एसआईआर की प्रक्रिया से जुड़ा काम कर रहे थे या उनके मन में इसको लेकर सवाल थे। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के चलते आत्महत्या करने के कई मामले सामने आए थे। अब ममता बनर्जी सरकार ने कुल 56 लोगों के परिवार के सदस्यों को नौकरी देने का ऐलान किया है।
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28 फरवरी को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची
पिछले साल पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में एसआईआर का ऐलान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की मंजूरी दी है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि अंतिम सूची मसौदा सूची के प्रारूप में ही होगी। इसमें हटाए गए नामों के आगे 'हटा दिया गया' है लिखा जाएगा। वहीं 'निर्णय चिह्न' वाले 60 लाख नामों के आगे 'निर्णय के अधीन' लिखा जाएगा।
