संजय सिंह, पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच शनिवार को आर्थिक अपराध इकाई ने एक ऐसी छापेमारी की, जिसने प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी। ग्रामीण कार्य प्रमंडल, झाझा में तैनात कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के पटना और जमुई स्थित चार ठिकानों पर एक साथ हुई रेड में करोड़ों की संदिग्ध संपत्ति, भारी मात्रा में नकदी और कीमती आभूषण मिलने की बात सामने आई है। सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया।

 

ईओयू की टीम सबसे पहले पटना के मजिस्ट्रेट कॉलोनी स्थित एक अपार्टमेंट में पहुंची, जहां फ्लैट नंबर एफ-2 की तलाशी के दौरान अधिकारियों की आंखें उस समय खुली रह गईं, जब वहां से 40 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद हुए। नकदी की मात्रा इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए मशीन मंगानी पड़ी। जांच के दौरान टीम को लाखों रुपये मूल्य के सोने, चांदी और हीरे के आभूषण भी मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया। 

 

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कागजात और रिकॉर्ड कब्जे में लिए 

इसके साथ ही ईओयू की अलग-अलग टीमों ने जमुई शहर के केकेएम कॉलेज के पास स्थित किराये के मकान, झाझा स्थित कार्यालय और अन्य ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों की निगरानी में चल रही इस कार्रवाई के दौरान बैंक खातों, जमीन खरीद-बिक्री, निवेश, बीमा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की गई। अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण कागजात और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं।

प्रशासनिक महकमे में सरगर्मी बढ़ी

सूत्रों के अनुसार, कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आई है, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 81.5 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआती खुलासा है और आगे जांच में कई और बड़े वित्तीय राज सामने आ सकते हैं।

 

बताया जा रहा है कि विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट मिलने के बाद ईओयू ने पूरी रणनीति के साथ इस कार्रवाई को अंजाम दिया। अधिकारियों ने बैंक लॉकरों, निवेश योजनाओं और संपत्ति के अन्य स्रोतों की भी जांच शुरू कर दी है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संपत्ति किन माध्यमों से अर्जित की गई और क्या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।

 

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छापेमारी की खबर फैलते ही ग्रामीण कार्य विभाग समेत प्रशासनिक महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच दिनभर इस कार्रवाई की चर्चा होती रही। माना जा रहा है कि बिहार सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में अब किसी भी स्तर पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है और आने वाले दिनों में ऐसे कई और बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

पूरी जानकारी देने से बच रहे हैं अधिकारी

ईओयू के अधिकारियों ने फिलहाल जांच पूरी होने तक विस्तृत जानकारी साझा करने से परहेज किया है, लेकिन जिस तरह से लगातार दस्तावेजों की जांच और संपत्तियों का आकलन किया जा रहा है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि मामला काफी गंभीर है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और इस हाईप्रोफाइल कार्रवाई से कौन-कौन से नए नाम सामने आते हैं।