बिहार के शेखपुरा जिले के कसार थाना क्षेत्र के बरसा गांव से अपहृत पांच वर्षीय मासूम दीपांशु कुमार की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। नौ दिन से लापता बच्चे का क्षत-विक्षत शव नवादा जिले के कौआकोल स्थित सुम्भा पहाड़ की खोह से बरामद होने के बाद गांव में मातम पसरा है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। पुलिस के अनुसार साइबर फ्रॉड से जुड़े 15 लाख रुपये के बंटवारे को लेकर इस मासूम की हत्या कर दी गई।
खेलते-खेलते गायब हो गया था दीपांशु
मृतक दीपांशु, बरसा गांव निवासी कन्हैया पंडित का पुत्र था। सात मई की शाम गांव में खेलते-खेलते वह अचानक गायब हो गया था। शुरुआत में परिजनों ने अपने स्तर से खोजबीन की, लेकिन जब दो दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला तो नौ मई को कसार थाना में अपहरण का मामला दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की।
साइबर ठगी से जुड़ा मामला
जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे संकेत मिले, जिससे मामला सामान्य अपहरण का नहीं बल्कि किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा प्रतीत हुआ। धीरे-धीरे खुलासा हुआ कि मृतक के पिता के खाते में साइबर ठगी से जुड़े करीब 15 लाख रुपये आए थे। इसी रकम के बंटवारे को लेकर गांव के कुछ लोगों के बीच विवाद चल रहा था। पुलिस का मानना है कि इसी विवाद में दबाव बनाने और हिस्सेदारी को लेकर दीपांशु का अपहरण किया गया। बाद में पहचान उजागर होने के डर से उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।
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इस मामले में पुलिस ने बरसा गांव के ही चार आरोपियों क्रमशः संतोष मांझी, प्रदीप मांझी, अजीत मांझी और संदीप मांझी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस नवादा जिले के कौआकोल थाना क्षेत्र स्थित सुम्भा पहाड़ पहुंची, जहां एक खोह से मासूम का शव बरामद किया गया। शव की स्थिति इतनी भयावह थी कि उसे देखकर पुलिसकर्मी भी सिहर उठे।
एसपी बोले- पैसे के बंटवारे को लेकर हुआ था बच्चे का अपहरण
शेखपुरा एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने बताया कि एसआईटी की जांच में साइबर फ्रॉड से जुड़े पैसों का एंगल सामने आया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने पैसों के बंटवारे को लेकर बच्चे का अपहरण किया और बाद में उसकी हत्या कर शव को पहाड़ की खोह में फेंक दिया। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस हत्याकांड में शामिल अन्य तीन आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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तो बच जाती दीपांशु की जान
इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह माना जा रहा है कि यदि शुरुआत में ही पूरी सच्चाई पुलिस के सामने रखी जाती तो शायद मासूम दीपांशु की जान बच जाती। गांव के लोग भी इस बात को लेकर स्तब्ध हैं कि पैसों के लालच में इंसानियत किस हद तक गिर सकती है। दीपांशु की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि साइबर अपराध का जाल अब सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसके तार अब हत्या जैसे जघन्य अपराधों से भी जुड़ने लगे हैं।