संजय सिंह, पटना: बिहार में हड़ताल पर गए अंचल और राजस्व अधिकारियों की मनमानी रोकने के लिए सरकार अब बेहद सख्त हो गई है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने साफ कहा है कि जो अधिकारी काम पर लौट आए हैं, उन्हें डराना या उन पर दबाव बनाना एक बड़ा अपराध है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को पता चला है कि हड़ताली कर्मचारी अपने ही साथियों को व्हाट्सएप कॉल और सोशल मीडिया के जरिए धमकियां दे रहे हैं। इसके साथ ही इंटरनेट पर 'नेमिंग एंड शेमिंग' यानी नाम लेकर बदनाम करने जैसे तरीकों से काम करने वाले अफसरों को परेशान किया जा रहा है, जिसे सरकार ने अनुशासन तोड़ना और एक गंभीर जुर्म माना है।

 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलाधिकारियों को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं जैसे 132, 351, 352, 126, 127, 349, 350 और 195 के तहत कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर डर फैलाने वालों के विरुद्ध आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत भी मुकदमा दर्ज करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर यह साफ किया है कि यह सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है और हर जिले से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से विभाग को भेजी जानी चाहिए।

 

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काम करने वाले अफसरों की सुरक्षा

विजय कुमार सिन्हा ने भरोसा दिलाया है कि जो अधिकारी ईमानदारी से काम पर लौट आए हैं, उन्हें पूरी सुरक्षा और सम्मान देना सरकार का फर्ज है। उन्होंने धमकाने वालों को डरपोक बताया और कहा कि ऐसे लोगों को चुन-चुनकर जेल भेजा जाएगा। सरकार की नजर उन लोगों पर भी है जो इस्तीफा देकर राजनीति में चले गए हैं और अब इस हड़ताल को भड़का रहे हैं। इन सभी नेताओं और पूर्व अधिकारियों के कामों की जांच कराई जाएगी ताकि सच सामने आ सके। सरकार का कहना है कि प्रशासन के काम में बाधा डालने वाला कोई भी व्यक्ति कानून से बच नहीं पाएगा।

 

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टूटा अधिकारियों का आंदोलन

सरकार के इस कड़े रुख का असर दिखने लगा है और हड़ताल कर रहे अधिकारियों के बीच डर साफ देखा जा सकता है। अब तक 24 अधिकारी हड़ताल छोड़कर वापस काम पर आ चुके हैं, जिससे यह आंदोलन कमजोर पड़ता दिख रहा है। सरकार ने पहले ही दूसरे कर्मचारियों को अतिरिक्त काम सौंप दिया है ताकि आम जनता का कोई काम न रुके। सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि काम रोकने और डराने की राजनीति अब नहीं चलेगी। अब बस यह देखना है कि आने वाले दिनों में बाकी बचे अधिकारी कब तक काम पर वापस लौटते हैं।