पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज को समय पर व्हीलचेयर या स्ट्रेचर नहीं मिला, जिसकी वजह से उन्हें पैदल चलकर शौचालय जाना पड़ा। इस वजह से रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। निमटा के रहने वाले विश्वजीत सामंता के परिवार का आरोप है कि अस्पताल की बदइंतजामी ने उनके मरीज की जान ले ली।
विश्वजीत सामंता को सोमवार तड़के सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी और उनकी नाक से खून भी बह रहा था। घरवाले उन्हें तुरंत अस्पताल के ट्रॉमा केयर यूनिट लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उनका शुरुआती इलाज किया और परिवार से कहा कि मरीज को भर्ती करने की कागजी कार्रवाई पूरी होने तक थोड़ा इंतजार करें। इसी बीच विश्वजीत को शौचालय जाने की जरूरत पड़ी।
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नहीं मिला व्हीलचेयर
मरीज की हालत इतनी खराब थी कि वह अपने पैरों पर खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। उनके बेटे और रिश्तेदारों ने अस्पताल के कर्मचारियों से बार-बार मिन्नतें कीं कि उन्हें एक व्हीलचेयर या ट्रॉली दे दी जाए लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। अस्पताल के अंदर मरीजों वाला शौचालय मरम्मत की वजह से बंद था और कर्मचारियों वाले शौचालय का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी गई। मजबूर होकर उन्हें अस्पताल के बाहर एक प्राइवेट 'पे एंड यूज' शौचालय जाने को कहा गया।
मरीज के बेटे ने बताया कि मजबूरी में वह अपने पिता को पैदल ही बाहर वाले शौचालय की तरफ ले जाने लगे। वह शौचालय पहली मंजिल पर था। जैसे ही विश्वजीत सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, वे अचानक गिर पड़े। उन्हें तुरंत वापस इमरजेंसी विभाग ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार का कहना है कि अगर अस्पताल उन्हें एक व्हीलचेयर दे देता, तो शायद आज वह जिंदा होते।
प्रशासन ने क्या कहा?
अस्पताल के बड़े अधिकारी सप्तर्षि चटर्जी ने माना कि इमरजेंसी में मरीजों के लिए बना शौचालय फिलहाल काम की वजह से बंद है। इस मामले पर विधायक अतिन घोष ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल की बहुत बड़ी लापरवाही है। अगर मरीजों वाला शौचालय बंद था, तो गंभीर रूप से बीमार मरीज को डॉक्टरों या नर्सों वाला शौचालय इस्तेमाल करने देना चाहिए था। उन्हें इस हालत में बाहर भेजना पूरी तरह गलत था।
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पुरानी घटनाएं और पुलिस की जांच
पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। आपको बता दें कि इस अस्पताल में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। अभी 20 मार्च को ही इसी अस्पताल की एक लिफ्ट में फंसकर एक व्यक्ति की जान चली गई थी, जिसमें पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन घटनाओं से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।