संजय सिंह, पटना। बिहार गुंडा बैंक के कारनामों को लेकर मशहूर रहा है। इसकी शुरुआत भागलपुर के नवगछिया पुलिस जिले से हुई थी। इस धंधे से कई सफेद पोश लोग जुड़े थे। धीरे धीरे यह धंधा पूरे राज्य में फैल गया था। अब यह धंधा माइक्रो फाइनेंस कंपनी के रूप में चल रहा है। ऊंची दरों पर कर्ज देने के बाद माइक्रो फाइनेंस कंपनियां गुंडों के सहयोग से कर्ज की राशि वसूलती है। कर्जदारों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने में भी ये नही चूकते। कभी कभी ये गुंडों के आतंक से कर्जदार आत्महत्या करने तक को मजबूर हो जाते हैं लेकिन अब यह कंपनियां ऐसा नहीं कर सकेंगी। 

 

अब माइक्रो फाइनेंस कंपनियां बिना राज्य सरकार से अनुमति लिए अपना कारोबार नहीं कर पाएंगी। गुंडों के आतंक को रोकने के लिए बिहार सरकार के वित्त विभाग ने माइक्रो फाइनेंस एक्ट का ग्राफ तैयार कर लिया है। वित्त विभाग ने इस ग्राफ को मंजूरी भी दे दी है। मंत्री परिषद को यह मंजूरी के लिए भेजा गया है। 2 फरवरी को बजट सत्र के दौरान इसे पेश किया जा सकता है। इसके बाद इन कंपनियों पर लगाम लग सकती है। 

 

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कैसे शुरू हुआ गुंडा बैंक का कारोबार?

गुंडा बैंक की शुरुआत भागलपुर जिला के नवगछिया पुलिस से हुई। लगभग 10 सालों तक यह कारोबार धड़ल्ले से चलता रहा। इस धंधे से कुछ नेता भी जुड़ गए थे। गुंडा बैंक से जुड़े कई लोगों ने कर्जदारों की या तो हत्या कर दी या अपहरण कर लिया। धीरे-धीरे यह मामला तुल पकड़ने लगा। फिर राज्य सरकार के निर्देश पर सीआईडी ने इस मामले की जांच शुरु की। सीआईडी की जांच के बाद कुछ लोगों पर कारवाई भी हुई।

 

इस बीच माइक्रो फाइनेंस कंपनियां ने अपना नेटवर्क फैलाना शुरू किया। यह कंपनी भी ग्रामीण क्षेत्रों में मोटी सूद की रकम लेकर लोगों को कर्ज देता था। कर्ज की वसूली के लिए इसने भी गुंडों को रखना शुरू कर दिया। कर्जदारों से वसूली के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। कई लोगों ने आत्महत्या भी कर ली। कोई ठोस कानून नही होने की वजह से पुलिस कारवाई नहीं कर पाती थी। 

एक महीने में तीन सुसाइड

हाल के दिनों में माइक्रो फाइनेंस कंपनी के गुंडों के आतंक से तंग आकर आत्महत्या की तीन घटनाएं हुई। इन घटनाओं ने फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करना शुरु कर दिए। भागलपुर जिले के घोंघा थाना क्षेत्र की महिला दुलारी देवी ने अपनी बेटी की शादी के लिए 80 हजार रुपये का कर्ज लिया था। वह समय पर किश्त नहीं दे पाई। गुंडों ने उसे तंग करना शुरु किया। उसने 24 जनवरी को आत्महत्या कर ली। 

 

दिसम्बर माह में मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र में अमरनाथ राम ने कर्ज के चक्कर में पड़कर अपने तीन बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली। समस्तीपुर के गुड़िया देवी को भी मजबूरन आत्महत्या का रास्ता अपनाना पड़ा। मुजफ्फरपुर की घटना को लेकर राजनीतिक बबाल भी हुआ। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने डीबीटी को इस मामले की जांच कराकर दोषी लोगों के खिलाफ कारवाई करने का निर्देश दिया। जांच के बाद कारवाई भी शुरू हुई। 

 

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नए कानून में क्या है?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से लाइसेंस लेने के बावजूद माइक्रो फाइनेंस कंपनी बिहार में तभी काम कर पाएगी, जब राज्य सरकार उसे कारोबार करने की अनुमति देगी। ज्यादती करने वाली कंपनियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए हर जिले में एक स्पेशल फोर्स बनाई जाएगी। इसके मुखिया फर्स्ट क्लास न्यायिक मजिस्ट्रेट होंगे। नए कानून का मसौदा वित्त विभाग ने तैयार कर लिया है।

 

इस ड्राफ्ट को मंजूरी के लिए मंत्रिपरिषद में भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद इसे दो फरवरी को बिहार विधानसभा के बजट सत्र में रखा जाएगा। इस नए कानून के कारण माइक्रो फाइनेंस कंपनी के गुंडे अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे। गुंडों के आतंक से आत्महत्या करने वाली मामलों में भी कमी आएगी।