संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति इन दिनों तेज हलचल के दौर से गुजर रही है। संभावित सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन को लेकर राजधानी पटना से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी कड़ी में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने महज 12 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दो बार मुलाकात कर राजनीतिक संकेतों को और गहरा कर दिया है।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में नई सरकार के गठन की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों की मानें तो अगले कुछ दिनों में बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आ सकता है। बताया जा रहा है कि 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यपाल को इस्तीफा सौंप सकते हैं, जबकि 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन तारीखों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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विधायकों को पटना में रहने का निर्देश
राजनीतिक गतिविधियों की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीजेपी और जेडीयू के सभी विधायकों को फिलहाल पटना में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसे संभावित सियासी घटनाक्रम के मद्देनजर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी स्तर पर लगातार बैठकों का दौर जारी है और हर गतिविधि पर शीर्ष नेतृत्व की नजर बनी हुई है।
बैठक को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं
मुख्यमंत्री आवास पर प्रस्तावित अहम बैठक को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में संभावित मंत्रिमंडल के स्वरूप, मंत्रियों की संख्या और विभागों के बंटवारे जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, अगले दो दिनों के भीतर इन सभी विषयों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है, जिससे नई सरकार का खाका पूरी तरह साफ हो जाएगा।
इधर, राजधानी पटना में एक और सियासी चर्चा ने माहौल को और गरमा दिया है। शहर के कई प्रमुख स्थानों, खासकर मुख्यमंत्री आवास और जेडीयू कार्यालय के बाहर निशांत कुमार के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में बिहार की जनता के लिए एक नए विकल्प की बात कही गई है। पोस्टरों में लिखा गया है कि राज्य को न बुलडोजर की राजनीति चाहिए और न दंगा-फसाद, बल्कि एक युवा जनसेवक के रूप में निशांत कुमार चाहिए। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया है।
पोस्टरबाजी भी शुरू
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह पोस्टरबाजी आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने का संकेत हो सकती है। हालांकि, इस पर किसी भी बड़े नेता की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है। वहीं, मौजूदा सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि 13 अप्रैल को नीतीश सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में भी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। यदि यह बैठक होती है, तो इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं, जो आगामी राजनीतिक बदलाव की नींव रखेंगे।
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दोनों डिप्टी सीएम भी मिले
शनिवार शाम को भी राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई, जब बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री अचानक मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। इनमें विजय सिन्हा के साथ मंत्री लखेंद्र पासवान भी शामिल थे। करीब आधे घंटे तक चली इस बैठक के बाद बाहर आए नेताओं ने संकेत दिया कि राज्य में जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और सभी निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लिए जाएंगे। कुल मिलाकर, बिहार में लगातार हो रही बैठकों, नेताओं की सक्रियता और पोस्टर पॉलिटिक्स ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं। सत्ता के समीकरण किस करवट बैठेंगे, यह तो जल्द ही स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन फिलहाल सियासी बिसात पर हर चाल बेहद सोच-समझकर चली जा रही है।
