संजय सिंह, पटना। बिहार की सियासत इन दिनों तेज़ी से करवट ले रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है लेकिन सत्ता के नए समीकरणों को लेकर जिज्ञासा और बढ़ गई है।
राजधानी पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर करीब दो घंटे तक बैठक की। इस बैठक में संभावित नए मंत्रिमंडल के स्वरूप, युवा चेहरों को शामिल करने और बदलते राजनीतिक हालात पर गहन चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी भी सक्रिय हो गई है।
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पटना में चर्चा
पार्टी की अहम बैठक पटना में आयोजित होने वाली है, जिसमें बिहार प्रभारी विनोद तावड़े शामिल होंगे। इस बैठक में संभावित मुख्यमंत्री चेहरे, सत्ता संतुलन और नई सरकार के गठन को लेकर मंथन होने की संभावना है। बीजेपी और जेडीयू के बीच तालमेल को लेकर भी यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसी बीच, चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का चेहरा बदल सकता है, लेकिन काम करने का फॉर्मूला वही रहेगा। उनके इस बयान को राजनीतिक स्थिरता का संकेत माना जा रहा है, हालांकि इससे यह भी साफ होता है कि वह फिलहाल राज्य की सत्ता की दौड़ से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
आरजेडी ने दी प्रतिक्रिया
आरजेडी की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बयान पर पलटवार करते हुए जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने कहा कि एक व्यक्ति मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा रहा है लेकिन उनके परिवार में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है। उन्होंने आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले नीतीश कुमार को मानसिक रूप से अस्थिर बताने वाली पार्टी को जनता ने महज 25 सीटों तक सीमित कर दिया। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का जिक्र करते हुए चौधरी ने कहा कि उनके परिवार में सत्ता का हस्तांतरण किस तरह हुआ, यह सबके सामने है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में आरजेडी और कमजोर होगी।
सोच समझ कर उठाए जा रहे हैं कदम
गौरतलब है कि शुक्रवार को नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। उन्हें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शपथ दिलाई। इस मौके पर बिहार एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस शपथ के साथ नीतीश कुमार ने एक अनोखा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। वह उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और विधान परिषद चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। राज्यसभा में यह उनका पहला कार्यकाल है, जो उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और सक्रियता को दर्शाता है।
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अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या 14 अप्रैल के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन होगा या मौजूदा व्यवस्था के साथ ही सरकार आगे बढ़ेगी। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है और हर बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।