संजय सिंह, पटना। महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा तथा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महागठबंधन और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने इसे लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया है।

 

उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 17 अप्रैल 2026 का दिन भारतीय राजनीति में काला दिवस के रूप में दर्ज हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महागठबंधन ने महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को गिराकर अपना लोकतंत्र विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। 

विपक्ष के कारण रणनीति विफल 

कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार इन विधेयकों के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को व्यापक अवसर देना चाहती थी, लेकिन विपक्ष की रणनीति ने इस प्रयास को विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक लोकतंत्र के मूल सिद्धांत समान प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ है। देश में लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या अत्यधिक हो गई है, जिससे जनप्रतिनिधियों के लिए प्रभावी ढंग से काम करना कठिन होता जा रहा है। 

 

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कुशवाहा के अनुसार परिसीमन के जरिए सीटों का पुनर्गठन होता तो हर नागरिक की आवाज को समान महत्व मिलता। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के लागू होने पर बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा सीटें 243 से बढ़कर 365 हो जातीं, जिससे राज्य को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर लाभ मिलता।

महिलाओं के साथ किया गया है धोखा

वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित नहीं होने पर विपक्ष का रवैया देश की आधी आबादी का अपमान है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि संसद के विशेष सत्र में महिलाओं के साथ धोखा हुआ है और विपक्षी दल इस पर खुशियां मना रहे हैं, जो बेहद शर्मनाक है। 

 

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ये दल महिला सशक्तिकरण के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां चाहती हैं कि केवल उनके परिवार की महिलाएं ही सत्ता में आएं, जबकि गरीब परिवारों की बेटियों को अवसर न मिले। उन्होंने विपक्ष के शीर्ष नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे अपने परिवार तक सीमित सोच रखते हैं और व्यापक महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर नहीं हैं।

 

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देशभर में शुरू किया जाएगा आंदोलन 

सम्राट चौधरी ने बताया कि यदि यह विधेयक पास हो जाता तो बिहार विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 29 से बढ़कर 122 तक पहुंच सकती थी। उन्होंने राज्य में पहले से लागू 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और आज करीब 59 प्रतिशत महिलाएं इन संस्थाओं में सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भविष्य में यह संकल्प जरूर पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि राजग इस मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन चलाएगा और विपक्ष को जनता के बीच बेनकाब करेगा।