बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राज्य के टॉप कुख्यात अपराधियों में शामिल संजय को धर दबोचा है। पांडव सेना के सरगना को STF की विशेष टीम ने बिक्रमशिला एक्सप्रेस से गिरफ्तार किया है। वह बिक्रमशिला एक्सप्रेस की बोगी नंबर B-2, बर्थ नंबर 12 से उस समय गिरफ्तार किया, जब वह पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार होने की फिराक में था। पटना जंक्शन पर हुई इस कार्रवाई में बिहटा थाना पुलिस और STF की संयुक्त टीम ने बेहद गोपनीय तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया।

 

बिहटा थाना प्रभारी ने बताया कि संजय पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र के निमा गांव का रहने वाला है। वह बिहटा थाना कांड संख्या छह सौ बहत्तर में AK-47 बरामदगी से जुड़े मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ बिहार और झारखंड के कई थानों में हत्या, नरसंहार, रंगदारी, हत्या की साजिश, अवैध खनन, जमीन कब्जाने और अवैध हथियार रखने जैसे दो दर्जन से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस अब दूसरे राज्यों में दर्ज मामलों की भी जानकारी जुटा रही है।

 

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सूत्रों के मुताबिक, संजय की गिरफ्तारी के लिए STF लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी। जैसे ही उसके पटना पहुंचने की पुख्ता सूचना मिली, STF और बिहटा थाना की संयुक्त टीम ने जाल बिछाया। थानाप्रभारी ने बताया कि इस ऑपरेशन में 7 से 8 पुलिसकर्मी शामिल थे। पूरी कार्रवाई इतनी गोपनीय थी कि संजय को भनक तक नहीं लगी। ट्रेन के पटना जंक्शन पहुंचते ही टीम ने बोगी नंबर B-2 को घेर लिया और बर्थ नंबर बारह से उसे दबोच लिया।

तीन दशक पुराना आपराधिक इतिहास

पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि संजय सिंह का आपराधिक इतिहास करीब तीन दशक पुराना है। उसके खिलाफ पटना, जहानाबाद, भागलपुर, हजारीबाग, रांची समेत बिहार और झारखंड के कई थानों में दो दर्जन से अधिक केस दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या की साजिश, रंगदारी, अपहरण, अवैध हथियार रखने, हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि दूसरे राज्यों में उसके खिलाफ और कितने मुकदमे लंबित हैं।

 

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संजय को 'पांडव सेना' नाम के खतरनाक आपराधिक गिरोह का सरगना माना जाता है। इस गिरोह ने लंबे समय तक मध्य बिहार में दहशत का माहौल बना रखा था। अवैध बालू खनन, जमीनों पर जबरन कब्जा करना और रंगदारी वसूलना इसका मुख्य धंधा था। जो भी इसके खिलाफ आवाज उठाता था उसे या तो मौत के घाट उतार दिया जाता था या फिर इलाका छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया जाता था। इस गिरोह के पास से AK-47 जैसे बेहद खतरनाक हथियार मिलने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई थी।