बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा थाना क्षेत्र का हरिपुर गांव सोमवार को अचानक पुलिस और एसटीएफ की गतिविधियों से थर्रा उठा। गांव के एक साधारण दिखने वाले घर के भीतर जमीन के नीचे ऐसा राज दफन था, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। पश्चिम बंगाल एसटीएफ और बिहार एसटीएफ की संयुक्त टीम ने यहां भूमिगत अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान चार लोगों को गिरफ्तार किया गया जबकि भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण, अर्धनिर्मित हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, एसटीएफ को लंबे समय से इस इलाके में अवैध हथियार निर्माण और सप्लाई की गुप्त सूचना मिल रही थी। इसी इनपुट के आधार पर कोलकाता एसटीएफ और बिहार एसटीएफ ने संयुक्त रणनीति तैयार की। सोमवार सुबह जैसे ही टीम हरिपुर गांव पहुंची, पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई। जिस घर पर कार्रवाई हुई, वह बाहर से सामान्य ग्रामीण मकान जैसा दिख रहा था लेकिन अंदर जमीन के नीचे बने गुप्त तहखाने में हथियारों का पूरा ‘वर्कशॉप’ संचालित हो रहा था।
बेसमेंट में चल रही थी हथियारों की फैक्ट्री
बताया जा रहा है कि पुलिस जैसे ही तहखाने तक पहुंची, वहां मशीनों की आवाज और हथियार तैयार करने का सामान देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। तहखाने में अत्याधुनिक मशीनों से देसी हथियारों को आधुनिक रूप देने का काम किया जा रहा था। मौके से पिस्टल, कट्टा और अन्य हथियारों के अर्धनिर्मित पार्ट्स, कारतूस और हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण बरामद किए गए।
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कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जेसीबी मशीन बुलाकर तहखाने में लगी भारी मशीनों को बाहर निकलवाया। कई मशीनों को मौके पर ही ध्वस्त कर जब्त किया गया। पूरे ऑपरेशन के दौरान गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और किसी को भी घर के आसपास आने की अनुमति नहीं दी गई।
एक ही परिवार था शामिल
जांच में सामने आया है कि यह अवैध नेटवर्क किसी बाहरी गिरोह का नहीं, बल्कि एक ही परिवार की ओर से चलाया जा रहा था। हरिपुर गांव निवासी सुरेंद्र मंडल के घर में चल रही इस फैक्ट्री को उसके पुत्र गब्बर मंडल, मिट्ठू मंडल और दामाद रूपेश मंडल मिलकर संचालित कर रहे थे। पुलिस ने मौके से वीर हमीद चौक, मुंगेर निवासी आफताब आलम, अनवर खान और स्थानीय संचालक गब्बर मंडल को गिरफ्तार किया है। चौथे आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है, लेकिन पुलिस ने फिलहाल उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस घर में यह फैक्ट्री चल रही थी, वहां बाहरी लोगों की आवाजाही अक्सर होती थी लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि जमीन के नीचे हथियारों का कारोबार फल-फूल रहा है। एसटीएफ की कार्रवाई के बाद गांव में दहशत और चर्चा दोनों का माहौल है।
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पुलिस कर रही है पूछताछ
धमदाहा थानाध्यक्ष रविशंकर प्रसाद ने संयुक्त कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस नेटवर्क के तार दूसरे जिलों और राज्यों से जोड़कर जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यहां बने हथियार किन अपराधियों तक पहुंचते थे और इस अवैध कारोबार का असली सरगना कौन है। एसटीएफ की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध हथियारों का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
