संजय सिंह, पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार, 23 फरवरी को सुपौल जिले के मरौना अंचल में तैनात एक सर्वे अमीन को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। आरोपी अमीन जमीन के सर्वे और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बदले घूस की मांग कर रहा था।
गिरफ्तार अमीन की पहचान विक्रम कुमार राम के तौर पर हुई है, जो असल में समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर का रहने वाला है। वह अभी मरौना इलाके में पोस्टेड था। निगरानी टीम ने निर्मली नगर पंचायत के वार्ड नंबर 1 में एक किराए के घर पर रेड की। जहां विक्रम रह रहा था। जैसे ही उसने शिकायत करने वाले से पैसे लिए पहले से जाल बिछाकर तैयार निगरानी टीम ने उसे पकड़ लिया।
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कौन था शिकायतकर्ता?
पूरे मामले की शुरुआत मरौना प्रखंड के खोरमा गांव निवासी जयनारायण यादव की शिकायत से हुई। जयनारायण ने पटना के निगरानी ब्यूरो में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी जमीन की नापी और सर्वे कार्य के बदले अमीन विक्रम 20 हजार रुपये मांग रहा है। शिकायत की पुष्टि होने के बाद डीएसपी नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने जयनारायण को केमिकल वाले नोट दिए और अमीन के पास भेजा। जैसे ही अमीन ने पैसे लिए, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। पानी में हाथ धुलवाते ही उसके हाथ गुलाबी हो गए। जो रिश्वत लेने का पुख्ता सबूत बना।
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इस ऑपरेशन को लीड करने वाले पटना के निगरानी ब्यूरो पुलिस पुलिस उपाधीक्षक नरेंद्र कुमार ने बताया कि शिकायत सही पाई गई। टीम ने काफी सबूत इकट्ठा करने के बाद एक्शन लिया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है और जरूरी पेपरवर्क पूरा करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि करप्शन के मामलों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जा रही है और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। अमीन विक्रम कुमार राम की गिरफ्तारी की खबर बिजली की तरह पूरे मरौना अंचल और आसपास के ऑफिसों में फैल गई। कई कर्मचारी और बिचौलिए कार्रवाई के डर से दफ्तर छोड़कर खिसकते नजर आए।
