महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर ऐसे मोड़ आते हैं जो सबको हैरान कर देते हैं, लेकिन इस बार जो 'कुर्सी का खेल' हुआ है, उसने कांग्रेस को एक बड़ा झटका दे दिया है। दरअसल, यह पूरा मामला चंद्रपुर नगर निगम के मेयर चुनाव से जुड़ा है, जहां कट्टर विरोधी माने जाने वाली बीजेपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने हाथ मिला लिया है। सालों की कड़वाहट और अलग विचारधारा के बावजूद इन दोनों दलों का एक साथ आना राज्य की राजनीति में एक नई चर्चा छेड़ गया है।

 

चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसके पास 66 में से 27 सीटें थीं, जबकि बीजेपी के पास 23 सीटें थीं। कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह आसानी से अपना मेयर बना लेगी, लेकिन पार्टी के भीतर मचे आंतरिक कलह ने सब बिगाड़ दिया। विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धानोरकर के गुटों के बीच खींचतान इतनी बढ़ गई कि कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर पाई। इसी बीच, उद्धव ठाकरे की सेना, जिसके पास चंद सीटें थीं, उन्होंने कांग्रेस से गठबंधन करने कि कोशिश की, लेकिन जब कांग्रेस ने उनके साथ हाथ मिलाने में बहुत रुचि नहीं दिखाई तो उद्धव गुट ने बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया।

 

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समझौते की शर्तें

बीजेपी और शिवसेना (UBT) के बीच सत्ता की साझेदारी के लिए समझौता किया है, जिसमें ढाई साल के कार्यकाल में पहले 15 महीने बीजेपी का मेयर होगा और उसके बाद अगले 15 महीने शिवसेना (UBT) का उम्मीदवार इस कुर्सी पर बैठेगा। इस गठबंधन के बाद बीजेपी की संगीता खंडरेकर को मेयर पद के लिए चुना गया है, जबकि शिवसेना (UBT) के प्रशांत दानव को डिप्टी मेयर बनाया गया है कांग्रेस जो जीत के बिल्कुल करीब थी, वह आपसी लड़ाई और उद्धव गुट को नजरअंदाज करने की वजह से सत्ता से बाहर हो गई।

 

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कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने क्या कहा?

इस हार से कांग्रेस पार्टी बहुत नाराज है। कांग्रेस के बड़े नेता हर्षवर्धन सपकाल ने इस गठबंधन पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने कांग्रेस के साथ धोखा किया है। सपकाल का कहना है कि एक तरफ तो उद्धव गुट राज्य में हमारे साथ रहने का दावा करता है, और दूसरी तरफ चुपके से बीजेपी के साथ जाकर हाथ मिला लेता है। कांग्रेस नेताओं ने इसे सिर्फ सत्ता का लालच बताया है और कहा है कि इस धोखे को जनता याद रखेगी।