संजय सिंह, पटना। आगामी 12 मई को होने वाले बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन इस बार मुकाबले से ज्यादा चर्चा एकतरफा समीकरणों की है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवार के रूप में अरविंद शर्मा (सूर्य कुमार शर्मा) को मैदान में उतारकर न सिर्फ रणनीतिक संदेश दिया है, बल्कि संगठन के भीतर भरोसे और नेतृत्व की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट कर दिया है।

विधानसभा पहुंच किया नामांकन

गुरुवार को अरविंद शर्मा ने विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पूर्व मंत्री मंगल पांडे समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं की इस एकजुट मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि गठबंधन पूरी मजबूती के साथ इस चुनाव में खड़ा है।

 

यह भी पढ़ें: चार की मौत और 12 लापता, जबलपुर में डैम में डूबा पर्यटकों से भरा क्रूज

मंगल पांडे के इस्तीफा से खाली हुई सीट

यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडे के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। पहले कई नामों की चर्चा थी। खासकर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था, लेकिन राजनीतिक सहमति नहीं बन पाने के कारण स्थिति बदल गई। ऐसे में बीजेपी ने अंतिम समय में रणनीति बदलते हुए अरविंद शर्मा पर भरोसा जताया। अरविंद शर्मा को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का करीबी माना जाता है। वे पहले उनके कार्यालय प्रभारी की भूमिका निभा चुके हैं और संगठन के भीतर उनकी पहचान एक शांत, संयमित और लक्ष्य केंद्रित नेता के रूप में रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उनका लंबे समय से तालमेल भी उनके पक्ष में गया। यही वजह है कि टिकट के लिए होड़ के बीच वे पार्टी नेतृत्व की पहली पसंद बनकर उभरे।

संगठन से जुड़े थे अरविंद शर्मा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चयन सिर्फ एक व्यक्ति का चयन नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन और भरोसे की राजनीति का उदाहरण है। बीजेपी ने इस फैसले के जरिए यह संदेश दिया है कि वह अपने विश्वसनीय और जमीन से जुड़े नेताओं को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है।

 

संख्याबल की बात करें तो बिहार विधानसभा में एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे अरविंद शर्मा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। यही कारण है कि विपक्ष की ओर से इस चुनाव को लेकर अब तक कोई ठोस रणनीति या सक्रियता नजर नहीं आई है। अगर मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो यह चुनाव औपचारिकता भर रह जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: अब हर सड़क-पुल का अलग टेंडर, सम्राट सरकार ने खत्म किया पैकेज सिस्टम

 

निर्विरोध निर्वाचन की संभावना भी काफी मजबूत मानी जा रही है। अगर विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता है तो 12 मई को मतदान की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और अरविंद शर्मा को सीधे विजेता घोषित किया जा सकता है। इस सीट का कार्यकाल 6 मई 2030 तक रहेगा।

 भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह 

नामांकन के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। पार्टी इसे संगठन की एकजुटता, नेतृत्व के प्रति विश्वास और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयारी के रूप में देख रही है।