पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में एक बार फिर सियासी हलचल तेज है। चंडीगढ़ में कल यानी 29 जनवरी, 2026 को एक बार फिर मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए वोटिंग होनी है। इस बीच आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस तीनों ने अपने उम्मीदावर मैदान में उतार दिए हैं। 2021 में हुए स्थानीय निकाय चुनाव से अब तक चंडीगढ़ में चार मेयर बन चुके हैं और कल पांचवे मेयर का चयन किया जाएगा।
चंडीगढ़ स्थानीय निकाय चुनाव 2021 में हुए थे। जनवरी 2022 में इस टर्म के लिए बीजेपी की सरबजीत कौर को मेयर चुना गया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया और कुलदीप कुमार मेयर बने। उनके बाद अनूप गुप्ता और मौजूदा मेयर हरप्रीत बबला भी बीजेपी के टिकट पर मेयर बने। पांच साल में पांच मेयर की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से सवाल उठाया जा रहा है।
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हर साल क्यों चुना जाता है मेयर?
चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है और यहां हर साल मेयर का चुनाव होता है। चंडीगढ़ में कुछ बदलावों के साथ पंजाब नगर निगम ऐक्ट-1976 को लागू किया गया है। इस ऐक्ट के अनुसार, पंजाब में तो मेयर का कार्यकाल पूरे पांच साल का होता है लेकिन चंडीगढ़ म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में मेयर का कार्यकाल 1 साल का होता है। इस मूल कानून में तो मेयर का कार्यकाल पांच साल का था लेकिन इस कानून को चंडीगढ़ में लागू करने के लिए कुछ बदलाव किए गए और पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन लॉ एक्सटेंशन टू चंडीगढ़ ऐक्ट 1994 लाया गया, जिसके तरह मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है। हालांकि, समय-समय पर चंडीगढ़ के जनप्रतिनिधि मेयर कार्यकाल को बढ़ाकर पांच साल का करने की मांग करते रहे हैं।
मेयर का कार्यकाल बढ़ाने की मांग
चंडीगढ़ के मेयर का कार्यकाल बढ़ाने की मांग कई सालों से हो रही है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी मुखर होकर इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने खुलकर इस बात का समर्थन किया है कि चंडीगढ़ के मेयर का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया जाना चाहिए।
इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में एक प्रस्ताव भी पेश किया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि इतने कम समय में मेयर प्रशासनिक ढांचा समझते-समझते ही पद से हट जाता है, जिससे विकास कार्यों में निरंतरता नहीं रहती। हर साल नेतृत्व बदलने से कई परियोजनाएं अटक जाती हैं। इस प्रस्ताव में दल बदल कानून लागू करने की बात भी कही गई थी। इसके अलावा मेयर की शक्तियां बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के मेयर का कार्यकाल बढ़ाने की मांग को ठुकरा दिया था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और चंडीगढ़ से सांसद रह चुके पवन बंसल ने भी चड़ीगढ़ के मेयर का कार्यकाल पांच साल करने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मेयर का कार्यकाल 5 साल का होना चाहिए। वह भी सीधे जनता के वोट से। उनका कहना है कि जब शहर के लोग सीधे मेयर का चुनाव करेंगे तो उनकी जिम्मेदारी बढ़ेगी।
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कल होंगे चुनाव
कल चंड़ीगढ़ के मेयर के लिए चुनाव होंगे। इन चुनावों में AAP, कांग्रेस और बीजेपी तीनों ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। हर तरफ जोड़-तोड़ की सियासत जारी है। हालांकि, AAP और कांग्रेस के साथ चुनाव ना लड़ने से बीजेपी के लिए इस चुनाव को आसान बताया जा रहा है। बीजेपी के पास 18, AAP के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद और एक सांसद का वोट है। ऐसे में बहुमत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 19 वोट चाहिए।
