logo

ट्रेंडिंग:

'जो समर्थक थे, झंडे उतार रहे हैं,' कैसे UGC के एक नियम पर फंसी BJP सरकार?

केंद्र में तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मोदी सरकार बनी है। 11 साल से ऐसा विरोध, बीजेपी ने कभी नहीं झेला, जैसा अब झेल रही है।

UGC Protest

UGC के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हो रहे हैं। Photo Credit: PTI

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Budget2

भारतीय जनता पार्टी (BJP) इन दिनों अपने समर्थकों के निशाने पर है। बीजेपी समर्थक, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की एक गाइडलाइन से इतने नाराज हैं कि अपने घरों से, छतों से और दफ्तरों से बीजेपी के झंडे उतार रहे हैं। गांव, गली और मोहल्लों से लेकर महानगरों तक, बीजेपी के समर्थकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। अगर आप सोशल मीडिया साइट पर ऐसे रील और वीडियोज की भरमार है, जब लोग बीजेपी के झंडे उतारने वाले वीडियो शेयर कर रहे हैं। 

लोग मुखर होकर कह रहे हैं कि जिस भारतीय जनता पार्टी को लोगों ने हिंदुत्व के लिए चुना था, उसने जातीय नजरिए से ऐसी नियमावली बना ली, जिसकी वजह से सवर्णों को अपराधी मान लिया गया है। दिलचस्प तथ्य यह है कि ऐसे भी वीडियोज वायरल हो रहे हैं, जिन्हें पता नहीं है कि इस नियम में क्या है लेकिन वे भी इस नियमावली के विरोध में हैं। हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और विकास की बात करने वाली जातिवाद पर बुरी तरह से घिर गई है।
 

यह भी पढ़ें: 'जो समर्थक थे, झंडे उतार रहे हैं,' कैसे UGC के एक नियम पर फंसी BJP सरकार?

नए नियम क्या हैं, जिस पर बवाल हो रहा है?

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 नाम से नए नियम जारी किए हैं। ये नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए हैं। ये पुराने 2012 के नियमों की जगह लेंगे और ज्यादा सख्त हैं। इनमें हर संस्थान में इक्विटी कमिटी, इक्विटी स्क्वॉड्स, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम बनाना अनिवार्य किया गया है।

UGC के नए नियम, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़े वर्ग (OBC)  छात्रों के खिलाफ होने वाले भेदभाव की शिकायतों को सुलझाने के लिए लाए गए हैं। नए नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आए हैं, जो रोहित वेमुला और पायल तड़वी के समर्थकों की याचिका पर था। रोहित वेमुला 2016 में हैदराबाद यूनिवर्सिटी में PhD छात्र थे और जातिगत उत्पीड़न के बाद सुसाइड कर लिया था। पायल तड़वी 2019 में मुंबई के मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर थीं और जातिवादी गाली-गलौज के बाद सुसाइड कर ली थीं।

 

 

यह भी पढ़ें: 4 मुद्दे, 4 चक्रव्यूह, अपनों के 'संग्राम' में ही उलझ गई है बीजेपी

नए नियम के खिलाफ प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

नए नियम आने के बाद देशभर में विरोध और प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा सिर्फ SC, ST और OBC तक सीमित है। यूजीसी की रेगुलेशन 3(c) में इसका जिक्र है। नए नियम में सामान्य वर्ग के छात्रों और फैकल्टी को सुरक्षा नहीं मिलती, भले ही उन्हें जाति के आधार पर परेशान किया जाए। प्रदर्शनकारी इसे रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन या एकतरफा नियम बताते हैं। 

 

 

लखनऊ में विरोध कर रहे छात्र। Photo Credit: PTI

 

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे मामले में क्या है?

दो अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं, जो इन नियमों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाती हैं। एक याचिका बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्चर मृत्युंजय तिवारी ने दाखिल की है। दूसरी एडवोकेट विनीत जिंदल ने। दोनों याचिकाओं में कहा गया है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हैं। यह अनुच्छेद, समानता के अधिकार से संबंधित है। याचिका में नए नियम पर अंतरिम रोक की मांग की गई है। ये याचिकाएं जल्द ही चीफ जस्टिस सूर्य कांत के सामने मेंशन होने वाली हैं।

 

 

यह भी पढ़ें: UGC नियम के विरोध में अयोध्या के संत, PM से कहा- इच्छामृत्यु की इजाजत दो

प्रदर्शन कर रहे छात्र क्या कह रहे हैं?

नए नियमों को लेकर प्रदर्शन सिद्धार्थनगर यूनिवर्सिटी में भी हुई है। प्रदर्शनकारियों में से एक, भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक सदस्य आकाश ठाकुर ने कहा, 'भेदभाव हर किसी के साथ हो सकता है, लेकिन सुरक्षा सिर्फ कुछ समुदायों को मिल रही है। हम चाहते हैं कि या तो ये प्रावधान हटाए जाएं या इसे जाति-निरपेक्ष बनाया जाए, जिससे सबको सुरक्षा मिले।'

 

सिद्धार्थनगर यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई करने वाली एक छात्रा श्रद्धा पांडेय ने कहा, 'नए नियम कैंपस में डर का माहौल बनाएंगे, क्योंकि आरोपी पर साबित करने का बोझ डाल दिया जाएगा और इक्विटी स्क्वॉड्स से हर वक्त निगरानी रहेगी।'

चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'ये नियम, सवर्णों को परेशान के लिए बनाए गए हैं। पीड़ित की परिभाषा पहले ही तय कर दी गई है। यह मान लिया गया है कि जाति विशेष में पैदा होने की वजह से आप उत्पीड़न के शिकार नहीं हो सकते। उत्पीड़न के कई स्तर होते हैं, हर स्तर को समझना अनिवार्य है।'

 

 

यह भी पढ़ें: UGC के नए नियमों के चलते चर्चा में आया रोहित वेमुला और पायल तड़वी केस क्या है?

बीजेपी समर्थक क्या कह रहे हैं?

जयंती पांडेय, पूर्व कार्यकर्ता, बीजेपी:-
बीजेपी, पीडीए हो गई है। वोट तोड़ने के डर से यूजीसी लेकर आ रही है। सवर्ण  पूरी तरह पीडीए के फार्मूले से डर गई है। पीडीए को तोड़ने के लिए UGC लागू कर दिया है। सवर्ण समाज के नेताओं ने मुंह में दही जमा ली है। यूपी में तो लोग ब्राह्मण-ठाकुरवाद से पीड़ित होने का दावा कर रहे थे, अब पीएम मोदी ने UGC लागू कर बता दिया कि तुम्हारी औकात अब इस देश में क्या है। बीजेपी जानती है कि सवर्ण समाज को अनैतिक पीड़ा कितना भी दिया जाए ये जाएंगे ही कहां। इनके पास क्या ही विकल्प है।'

 
बीजेपी के एक बूथ प्रभारी पिंटू त्रिपाठी ने कहा, 'हम बीजेपी से छात्र जीवन से ही जुड़े हैं। पहले शंकराचार्य का अपमान, अब यूजीसी, बीजेपी ने मोहभंग हो रहा है। हम अपने छत से झंड़ा उतार रहे हैं। लोग हमसे सवाल कर रहे हैं, हम जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं। हमारी पार्टी ने हमें फंसा दिया है।'

सुनील श्रीवास्तव पेशे से वकील हैं और बीजेपी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा, 'UGC का यह फैसला समता मूलक सिद्धांत के ही खिलाफ है। आप एक वर्ग विशेष के बारे में यह मान ले रहे हैं कि उनका उत्पीड़न हो ही नहीं सकता। यह भेदभाव भरा कानून है, जिसे वापस लेने की जरूरत है।'

यह भी पढ़ें: 'रोयां-रोयां उखाड़ लो...', BJP के अपने भी UGC नियमों के खिलाफ, बढ़ रही मुश्किल

इस्तीफा जो खूब चर्चा में रहा

उत्तर प्रदेश के बरेली में सस्पेंडेड सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी के इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि सवर्ण संगठन, इन नियमों से चिंतित हैं।  

केंद्र सरकार क्या कह रही है?

यूनियन एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और कोई नियम का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। उन्होंने भरोसा दिया कि केंद्र, UGC और राज्य सरकारें संविधान के दायरे में ही नियम लागू करेंगी। 

वकीलों का क्या कहना है?

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंग ने विरोध की आलोचना की और कहा कि विरोध सिर्फ अगड़ी जातियां कर रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इसे तर्कसंगत तरीके से देखेगा। 

यह भी पढ़ें: UGC विरोध का नया तरीका, अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं को चूड़ी भेज रहे BJP नेता

नेता क्या कह रहे हैं?

शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि नियमों को वापस लिया जाए या जरूरत अनुसार संशोधित किया जाए। उन्होंने फॉल्स आरोपों, दोष साबित करने और भेदभाव की परिभाषा पर सवाल उठाए।


प्रिंयका चतुर्वेदी, सांसद, शिवसेना:-
आप और ज्यादा भेदभाव लाकर भेदभाव को खत्म नहीं कर सकते। UGC की गाइडलाइंस पर मेरा यही मानना ​​है, जिसने इसे खत्म करने के बजाय स्टूडेंट कैंपस में और ज्यादा नफर पैदा कर दी है। शिक्षा मंत्री को इसमें दखल देना चाहिए।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, '2005 में सवर्ण गरीबों की स्थिति पर सीनों कमीशन कांग्रेस, आरजेडी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, डीएमके,बसपा,कम्युनिस्ट पार्टी ने बनवाया। 2010 में 5 साल में रिपोर्ट आया। सवर्ण समाज के बच्चों के हाथ में झुनझुना मिला। मोदी ने ही EWS आरक्षण दिया, आज गरीब IAS, IPS, डॉक्टर और प्रोफेसर हैं,उच्च शिक्षा में भी आरक्षण पाकर पढ़ाई कर रहे हैं। जो काम करें उसी का विरोध, इस UGC की भ्रांति भी लोगों के सामने आएगी। संविधान की धारा 14-15 पूर्णतया लागू होगा। काश इतनी आक्रामकता अल्पसंख्यक संस्थानों के मिले अधिकारों पर होता जो संविधान की धारा 25 से 29 तक पढ़ पाते।'


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap