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'रोयां-रोयां उखाड़ लो...', BJP के अपने भी UGC नियमों के खिलाफ, बढ़ रही मुश्किल

UGC के नियमों के खिलाफ कवि कुमार विश्वास भी उतर आए हैं। उधर बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण ने भी इसको लेकर सवाल उठाए हैं।

kumar vishwas and prateek bhushan

कुमार विश्वास और प्रतीक भूषण ने उठाए सवाल, Photo Credit: Social Media

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UGC के नए नियम अब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए गले की फांस बनते दिख रहे हैं। अब बीजेपी के अंदर भी इसका विरोध शुरू हो गया है। अब उत्तर प्रदेश की गोंडा सदर सीट से बीजेपी के विधायक प्रतीक भूषण सिंह और कवि डॉ. कुमार विश्वास ने सार्वजनिक तौर पर इसके खिलाफ आवाज उठाई है। UP के पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री इसी के विरोध में इस्तीफा दे चुके हैं। साथ ही, बीजेपी के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी इन्हीं नियमों के चलते पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।

 

उधर कई संगठनों ने दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने यूजीसी मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जल्द ही यूजीसी की ओर से इस पर एक स्पष्टीकरण भी जारी किया जा सकता है।

 

यह भी पढ़ें: UGC के एक नियम से मची खलबली, आखिर ऐसा क्या बदलाव हो गया?

कुमार विश्वास ने इशारों में कसा तंज

वहीं, कवि कुमार विश्वास ने स्वर्गीय रमेश रंजन की पंक्तियों के सहारे तंज कसा है। वह लिखते हैं, 'चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।' कुमार विश्वास ने सीधे-सीधे बात नहीं कही है लेकिन उनकी पोस्ट में हैशटैग (#UGC_Rollback) लिखा है, जिससे यह स्पष्ट है कि वह भी इसी मुद्दे पर बात कर रहे हैं।

 

प्रतीक भूषण ने क्या कहा?

 

उत्तर प्रदेश के गोंडा से विधायक और बृज भूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण ने इस मुद्दे पर लिखा है, 'इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए। जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिह्नित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।'

 

दूसरी तरफ बीजेपी के नेता और पहलवान योगेश्वर दत्त ने भी इसको लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है, 'पूरे देश में सभी वर्ग, जाति और सामाजिक समानता को संविधान द्वारा सुरक्षा दी जाती है। मौलिक समानता का अधिकार हम सभी भारतवासियों का है और हम सबके पूर्वजों ने इसकी न सिर्फ़ सुरक्षा की है बल्कि अपने त्याग- बलिदान से आज तक भारतीय संस्कृति को जीवित रखा है। किशोरावस्था की शुरुआत में ही शिक्षा के स्तर पर भविष्य के नागरिकों का जीवन बिना सुनवाई और समानता के अंधकारमय कर देना इस देश को गर्त में ले जाएगा।'

 

 

 


उन्होंने आगे लिखा है, 'हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना भी हमारा धर्म और राष्ट्र का सच्चा हित है।पहले ही यह देश भूतकाल के कुछ गलत फैसलों की सजा भुगत रहा है और हम वर्तमान में UGC द्वारा आपसी बटवारे की खाई को ओर गहराता बिल संवेदनशील मुद्दों पर निश्चित ही हमारे देश को गलत दिशा में ले जाएगा। एक भारत श्रेष्ठ भारत की एकता और अखंडता के लिए ऐसे नियम यह सही नहीं है।'

 

 

यह भी पढ़ें: 'यह पंडित पागल हो गया है', इस्तीफे और आरोप के बाद सस्पेंड हुए अलंकार अग्निहोत्री

देवेंद्र सिंह ने लिखी चिट्ठी

यूपी विधान परिषद के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने इसी मुद्दे को लेकर यूजीसी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने इसे लिखा है कि इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में पठन-पाठन का माहौल समाप्त हो जाएगा। देवेंद्र सिंह ने अपील की है कि नियम बनाते समय संतुलन का ध्यान दिया जाए ताकि दलित और पिछड़े वर्ग के साथ अन्याय न हो और सामान्य वर्ग के छात्र असुरक्षित न हों।

 

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