संजय सिंह, पटनाः एक युवक शूट बूट पहने छपरा के डीएम वैभव श्रीवास्तव से मिलने पहुंचा। वह डीएम पर दबाव डालकर किसी का काम करवाना चाहता था। डीएम को उसके हाव-भाव से संदेह हुआ। असली डीएम ने नकली डीएम से उसका परिचय पत्र मांगा। अब असली डीएम को यह संदेह हो गया कि उसके सामने बैठा व्यक्ति फर्जी है। इसके बाद क्या था उसे पुलिस को बुलाकर उसे जेल भेज दिया गया।
छपरा के ही मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बसाढ़ी गांव का रहनेवाला रितेश कुमार दो फरवरी के दोपहर बाद समाहरणालय पहुंचा। उसने डीएम के आदेशपाल को अपना परिचय देते हुए बताया कि वह उत्तर प्रदेश के मेरठ में डीएम के पद पर तैनात है। आदेशपाल ने यह सुनकर तुरंत अपने साहब वैभव श्रीवास्तव को इसकी सूचना दी। छपरा डीएम वैभव श्रीवास्तव ने तुरंत उन्हें अंदर बुलाने का आदेश दिया।
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असली डीएम को हुआ शक
आदेशपाल ससम्मान जालसाज युवक को डीएम के चेंबर तक ले गया। फिर जालसाज युवक ने असली डीएम से कुछ गलत काम करवाने के लिए दबाव बनाना शुरू किया। असली आईएएस अधिकारी को उसके बातचीत की शैली से संदेह हुआ। थोड़ी देर के बातचीत में ही छपरा के डीएम को यह बात अच्छी तरह से समझ में आ गई कि उनके सामने बैठा व्यक्ति पढ़ा लिखा नटवरलाल है। उन्होंने उसे बातचीत में उलझाए रखा और पुलिस को बुलवा लिया।
पुलिस के आने के बाद उससे परिचय पत्र मांगा गया। उसने परिचय पत्र दिखाने में असमर्थता जताई। डीएम का संदेह अब यकीन में बदल गया। जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
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छोटे अधिकारियों पर जमाता था धौंस
फर्जी आईएस अधिकारी के गिरफ्तारी की खबर पूरे जिले में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। लोगों ने बताया कि यह युवक फर्जी आईएस बनकर छोटे अधिकारियों पर धौंस जमाकर लोगों का काम करवाता था। इसके एवज में वह कमाई भी करता था। इस बार फर्जी आईएस अधिकारी का पाला असली आईएस अधिकारी से पड़ गया और उसे जेल की हवा खानी पड़ी।
