नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में बिहार ने विकास का ऐसा रोडमैप पेश किया, जिसने शिक्षा, कौशल, कृषि, उद्योग, पर्यटन और ऊर्जा जैसे लगभग हर क्षेत्र में राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि बिहार केवल विकास की दौड़ में शामिल नहीं है, बल्कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इसी के तहत केंद्र सरकार से 18 हजार करोड़ रुपये की विशेष सहायता समेत कई बड़ी मांगें रखी गईं।

शिक्षा और तकनीक में बदल रही तस्वीर

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में आंगनबाड़ी से स्कूल शिक्षा तक व्यापक सुधार हुए हैं। 11,529 स्वीकृत सक्षम आंगनवाड़ियों में से 10,579 केंद्रों पर पोषण वाटिकाएं विकसित की जा चुकी हैं। 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के करीब 70 प्रतिशत बच्चों को APAAR आईडी उपलब्ध कराई गई है। वहीं 76 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों में से 91 प्रतिशत इंटरनेट से जुड़ चुके हैं और 9 हजार से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित हो रही हैं।

 

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कौशल विकास को मिलेगा नया आयाम

बिहार ने कौशल विकास के क्षेत्र में भी अपनी उपलब्धियां गिनाईं। पीएम-विश्वकर्मा योजना के तहत 1.18 लाख कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। पटना में 640 करोड़ रुपये की लागत से आर्यभट्ट अंतरराष्ट्रीय कौशल हब का निर्माण हो रहा है। मुख्यमंत्री ने ISSA पायलट परियोजना के लिए 750 करोड़ रुपये, जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय के लिए 1,500 करोड़ रुपये और भागलपुर में NSTI की स्थापना के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।

आईएआईएसईआर और एसपीए की मांग से उच्च शिक्षा को नई दिशा

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज स्थापित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बिहार में आईएआईएसईआर और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर की क्षेत्रीय शाखा खोलने का आग्रह किया, ताकि राज्य के विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े।

खेल महाशक्ति बनने की तैयारी

बिहार ने हाल के वर्षों में एशियन हॉकी चैंपियनशिप, एशियन रग्बी चैंपियनशिप और खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2025 के सफल आयोजन का उल्लेख करते हुए 2028 नेशनल यूथ गेम्स, 2030 हॉकी विश्व कप और 2031 राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए केंद्र का समर्थन मांगा।

 

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मखाना से कृषि अर्थव्यवस्था को नई उड़ान

कृषि क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए एग्री स्टैक और यूनिक आईडी की पहल का जिक्र किया। साथ ही राज्य में सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सब्ट्रोपिकल हॉर्टिकल्चर की स्थापना, राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का कार्यालय और NIFTEM की शीघ्र स्थापना की मांग रखी। यह मांग खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बिहार देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है।

बोधगया को बनाया जाएगा वैश्विक आकर्षण केंद्र

'वन स्टेट: वन ग्लोबल डेस्टिनेशन' योजना के तहत गयाजी और बोधगया को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति भी प्रस्तुत की गई। विष्णुपद कॉरिडोर, महाबोधि कॉरिडोर और राजगीर-नालंदा-बोधगया के एकीकृत विकास कार्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने की मांग की गई।

 

लखपति दीदी योजना में देश में नंबर-1 बिहार

मुख्यमंत्री ने बताया कि 48.30 लाख लखपति दीदियों के साथ बिहार देश में प्रथम स्थान पर है। इसके अलावा राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र और भाव्या योजना के तहत 10 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क आवंटित करने का भी अनुरोध किया गया।

ऊर्जा और उद्योग में निवेश का नया दौर

पीरपैंती में 2,400 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है, जबकि लखीसराय के कजरा में देश का सबसे बड़ा बैटरी आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। राज्य सरकार 10 लाख रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। उद्योग क्षेत्र में 14,037 एकड़ नई औद्योगिक भूमि स्वीकृत की गई है और पिछले दो वर्षों में बिहार ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है।

18 हजार करोड़ की विशेष सहायता की बड़ी मांग

बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी वित्तीय मांग रखते हुए कहा कि हर घर नल का जल योजना के तहत बिहार ने जल जीवन मिशन का लक्ष्य समय से पूरा कर लिया, लेकिन केंद्रांश की राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है। राज्य ने पूर्व में खर्च की गई राशि के लिए 13 हजार करोड़ रुपये और वर्तमान योजनाओं के लिए 5 हजार करोड़ रुपये, कुल 18 हजार करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने का आग्रह किया।

विकसित भारत के संकल्प में बिहार की मजबूत दावेदारी

नीति आयोग की बैठक में बिहार का प्रस्तुतीकरण केवल उपलब्धियों का ब्यौरा नहीं था, बल्कि भविष्य की विकास यात्रा का विस्तृत खाका भी था। मखाना बोर्ड, आईएआईएसईआर, एनएसटीआई, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, औद्योगिक पार्क और 18 हजार करोड़ रुपये की सहायता जैसी मांगों के जरिए बिहार ने साफ संकेत दिया कि वह आने वाले वर्षों में देश की विकास गाथा का प्रमुख केंद्र बनने की तैयारी कर चुका है।