संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने के फैसले ने सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता लगभग साफ हो गया है और सत्ता के नए समीकरण खुलकर सामने आने लगे हैं।

बीजेपी को सीएम पद, जदयू को दो डिप्टी सीएम

जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए संकेत दिया है कि बीजेपी और जदयू के बीच नई सरकार को लेकर सहमति बन चुकी है। सूत्रों के अनुसार, इस बार मुख्यमंत्री पद बीजेपी के पास जाएगा, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाएंगे। यह बदलाव बिहार की राजनीति में लंबे समय बाद एक नई दिशा का संकेत माना जा रहा है। 

 

चर्चाओं के केंद्र में बीजेपी के दिग्गज नेता नित्यानंद राय और सम्राट चौधरी हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा, लेकिन दोनों नेताओं के नाम तेजी से उभर रहे हैं। 

 

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बीजेपी के 15 और जदयू के 16 बनेंगे मंत्री

नई सरकार के संभावित स्वरूप पर नजर डालें तो बीजेपी को 15 मंत्री पद और जदयू को 16 मंत्री पद मिलने की संभावना है। वहीं सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोगी दलों को भी शामिल किया जाएगा। लोजपा (रामविलास) को दो मंत्री पद और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को एक मंत्री पद दिए जाने की चर्चा है। इसके अलावा विधानसभा में स्पीकर पद बीजेपी के पास रहेगा, जबकि विधान परिषद में सभापति जदयू का होगा।

निशांत कुमार के सीएम बनने की चर्चा तेज

इन सभी राजनीतिक हलचलों के बीच एक और नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। अब तक राजनीति से दूरी बनाकर रखने वाले निशांत कुमार ने हाल ही में जदयू की सदस्यता लेकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। उनका जदयू कार्यालय पहुंचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वे अब सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। 

 

20 जुलाई 1975 को पटना में जन्मे निशांत कुमार अपनी सादगी और कम प्रोफाइल जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हमेशा सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों ने उन्हें नई जिम्मेदारी की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। जदयू के भीतर उन्हें लेकर सकारात्मक माहौल है और कई नेता उन्हें पार्टी का भविष्य मान रहे हैं।

 

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राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि निशांत कुमार को जल्द ही बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। यहां तक कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। अगर ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होगी, जहां एक नई पीढ़ी नेतृत्व की कमान संभालेगी। हालांकि उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन्हें न सिर्फ अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना होगा, बल्कि जनता के बीच अपनी अलग पहचान भी बनानी होगी।

 

सीएम के इस्तीफे की अटकलों के बीच बिहार में सियासी मोड़

फिलहाल नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया ने बिहार की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ता का यह परिवर्तन राज्य के राजनीतिक भविष्य को किस दिशा में ले जाता है और निशांत कुमार इस नई पारी में खुद को कैसे साबित करते हैं।