महाराष्ट्र के नासिक में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक बड़ी आईटी कंपनी में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, रेप और जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए नासिक पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी आरोपियों पर अलग-अलग आरोप हैं। कॉर्पोरेट में इस तरह के मामले की चर्चा हर तरफ है। इनमें से एक टीम लीडर पर रेप का भी आरोप है। बताया जा रहा है कि यह कंपनी बीपीओ सेक्टर में काम करने वाली मल्टीनेशनल कंपनी का है।
इस मल्टीनेशनल आईटी में काम करने वाले एक हिंदू कर्मचारी को ऑफिस में जबरन नमाज पढ़ने के लिए मजबूर करने और उसे जबरन मांसाहारी भोजन खिलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करने का आरोप है। पीड़ित कर्मचारी की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसके बाद से मामला सुर्खियों में है।
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9 पीड़ित आए सामने
इस मामले में अब तक कुल 9 पीड़ित सामने आए हैं जिनमें एक लड़का भी शामिल है। इस मामले में अब पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी गई है। शिकायत के अनुसार, आरोपी तैसीफ अत्तर, दानिश, शाहरुख शेख और रजा मेमन ने एक हिंदू युवक को धर्म बदलने के लिए मजबूर किया। इन लोगों ने कंपनी में एक हिंदू युवक को दोपहर में नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं शिकायत में यह भी बताया गया है कि हिंदू युवक को बीफ मटन भी खिलाया गया। शिकायत पर पुलिस ने छह लोगों पर छेड़छाड़, बलात्कार, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज किया है।
तीन साल से कर रहे थे परेशान
शिकायत करने वाली महिला कर्मचारियों ने बताया है कि कंपनी में पिछले तीन सालों से यह सब चल रहा था। महिलाओं ने आरोप लगाया कि आरोपी उन्हें शारीरिक रूप से परेशान करने की कोशिश करते थे। कपड़ों और शरीर पर भद्दे कमेंट करते थे। इसके साथ ही महिलाओं पर मानसिक रूप से दबाव बनाते थे। इसके अलावा शिकायत में धार्मिक कमेंट और जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
पीड़िताओं ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट में शिकायत की थी लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके कारण एचआर डिपार्टमेंट की एक अधिकारी के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया गया है।
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जांच में जुटी पुलिस
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। इस टीम में करीब 12 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। एसआईटी टीम अब सबूतों की जांच में जुट चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ितों की पहचान को गोपनीय रखा गया है। इसके साथ ही जांच की जा रही है कि यह मामला कंपनी की इसी यूनिट से जुड़ा है या फिर अन्य जगहों पर भी इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं। पुलिस ने इस मामले में और इस तरह की अन्य शिकायतों के लिए शिकायत दर्ज करवाने के लिए कहा है और सभी का नाम गोपनीय रखने का आश्वासन दिया है।
