बिहार के सीतामढ़ी जिले के रीगा थाना क्षेत्र में एक जुलाई को सीएसपी संचालक से डेढ़ लाख रुपये की हुई लूट का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस अधीक्षक अमित रंजन के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी अनुसंधान, सीसीटीवी फुटेज और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 5 बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। मुठभेड़ के दौरान मुख्य आरोपी के पैर में गोली लगी है। बदमाशों के पकड़े जाने के बाद इलाके के लोगों में राहत की सांस ली है।
ह्यूमन पुल पर घेराबंदी, फायरिंग कर भागा बदमाश
पुलिस के अनुसार दो जुलाई की रात नगर थाना क्षेत्र के ह्यूमन पुल के पास संदिग्धों की घेराबंदी की गई। पुलिस को देखते ही मुख्य आरोपी पंकज कुमार फायरिंग करते हुए भागने लगा। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान पंकज के पैर में गोली लगी। घायल होने के बाद उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। मौके से उसके चार साथी भी पकड़े गए।
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दो कट्टा, पिस्तौल और लूटी बाइक मिली
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर लूट में प्रयुक्त दो देसी कट्टा, एक देसी पिस्तौल और दो कारतूस बरामद किए गए। इसके साथ ही परसौनी थाना क्षेत्र से लूटी गई एक अपाची मोटरसाइकिल भी पुलिस ने बरामद कर ली है। पुलिस का कहना है कि इसी बाइक से बदमाश वारदात को अंजाम देकर फरार हुए थे।
प्रारंभिक जांच में मुख्य आरोपी पंकज का आपराधिक इतिहास सामने आया है। वह लूट, डकैती समेत कई गंभीर मामलों में पहले से संलिप्त रहा है। पुलिस उसके पुराने नेटवर्क को भी खंगाल रही है। माना जा रहा है कि वह इलाके में सक्रिय बड़े गिरोह का हिस्सा है।
गिरफ्तार अन्य आरोपियों की पहचान अंकित कुमार, लड्डू कुमार, आदित्य कुमार और कमलेश कुमार के रूप में हुई है। सभी सीतामढ़ी जिले के रहने वाले हैं। पूछताछ में इन लोगों ने रीगा में हुई सीएसपी लूटकांड में अपनी संलिप्तता कबूल की है। पुलिस इनके मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगाल रही है।
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नकदी बरामदगी के लिए छापेमारी
पुलिस लूट के डेढ़ लाख रुपये की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। आशंका है कि बदमाशों ने रकम को आपस में बांट लिया है। इसके अलावा गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस टीम दबिश दे रही है। एसपी अमित रंजन ने बताया कि मामले में आगामी कानूनी कार्रवाई जारी है।
'सीसीटीवी बना बड़ा हथियार'
एसपी द्वारा गठित विशेष टीम ने तकनीकी अनुसंधान को सबसे बड़ा हथियार बनाया। एक जुलाई को हुई लूट के बाद पुलिस ने आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाले। बाइक के नंबर और बदमाशों के हुलिए से सुराग मिला। मानवीय सूचना के साथ तकनीक को जोड़कर पुलिस 24 घंटे में ही पूरे गिरोह तक पहुंच बनाई।


