दिल्ली पुलिस ने एक स्पेशल स्टिंग ऑपरेशन में फास्ट-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के खिलाफ आर्म्स ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई तब हुई जब पुलिस ने जांच के लिए ब्लिंकिट ऐप से एक चाकू ऑर्डर किया और पाया कि कंपनी नियमों का उल्लंघन कर रही थी और बैन हथियार बेच रही थी। खास बात यह है कि पुलिस ने जानबूझकर चाकू का डिलीवरी एड्रेस पुलिस स्टेशन की दूसरी मंजिल बताया था।
पश्चिम दिल्ली के ख्याला थाने में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, ख्याला इलाके में हाल में हुई हत्या की दो घटनाओं में इस्तेमाल किए गए चाकू कथित तौर पर ऑनलाइन खरीदे गए थे। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने ई-कॉमर्स और त्वरित डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर बिक रहे चाकुओं की विशेष जांच शुरू की।
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पुलिस ने कब किया या स्पेशल स्टिंग?
वेरिफाई करने के लिए कॉन्स्टेबल ने 13 फरवरी को दोपहर 3:43 बजे ऑनलाइन 710 रुपये का चाकू ऑर्डर किया। डिलीवरी का पता जानबूझकर पुलिस स्टेशन की दूसरी मंजिल का दिया गया था। चाकू शाम करीब 4:05 बजे स्टेशन परिसर में पहुंचा। जांच में पता चला कि चाकू गेबल्ड था, जिसका मतलब है कि इसे हाथ से खोला और बंद किया जा सकता था।
नियमों का उल्लंघन कैसे किया गया?
नियमों के मुताबिक ब्लेड की अधिकतम लंबाई 7.62 सेंटीमीटर और चौड़ाई 1.72 सेंटीमीटर तय है लेकिन डिलीवर किए गए चाकू की ब्लेड लंबाई 8 सेंटीमीटर और चौड़ाई 2.5 सेंटीमीटर मिली। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस वजह से यह चाकू अवैध हथियार की श्रेणी में आया और सरकारी अधिसूचना का उल्लंघन पाया गया।
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डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (वेस्ट) ने बताया कि यह कार्रवाई नियमित सत्यापन अभियान का हिस्सा थी, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऑनलाइन बेचे जा रहे उत्पाद कानून के अनुरूप हों। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने 15 फरवरी को दिल्ली के अलग-अलग डार्क स्टोर और प्लेटफॉर्म से जुड़े आउटलेट्स पर छापेमारी की, जहां से 16 चाकू बरामद हुए। पुलिस ने आर्म्स एक्ट की धाराओं 25, 54 और 59 के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
