संजय सिंह, पटना। बिहार की सियासत में 7 मई का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। राजधानी पटना का गांधी मैदान एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का गवाह बनेगा, जहां सम्राट मंत्रिमंडल का पहला विस्तार भव्य समारोह होगा। इस बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार में 30 से अधिक मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी, जिससे राज्य की सत्ता संतुलन और राजनीतिक समीकरणों पर दूरगामी असर पड़ने की उम्मीद है।

 

समारोह को खास बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी तय मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर गांधी मैदान में तीन हेलीपैड बनाए गए हैं, जबकि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

 

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मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज

कैबिनेट विस्तार से पहले भाजपा और जदयू दोनों ही अपने-अपने कोटे के मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। भाजपा की सूची पर अंतिम मुहर अमित शाह की सहमति के बाद लगेगी, जबकि जदयू के संभावित नामों को पार्टी नेतृत्व की मंजूरी मिल चुकी है। 

एनडीए में संतुलन साधने का प्रयास

कैबिनेट विस्तार में भाजपा और जदयू के बीच संतुलन बनाए रखने की स्पष्ट कोशिश दिख रही है। भाजपा के 15 और जदयू के 14 मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही जदयू के पहले से मौजूद दो उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव को जोड़कर पार्टी की कुल मंत्री संख्या 16 हो जाएगी। वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों को भी हिस्सेदारी दी जा रही है। 

 

चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) से दो, जीतन राम मांझी की पार्टी हम से एक और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो से एक मंत्री बनाए जाने की तैयारी है। इससे गठबंधन के भीतर सामंजस्य बनाए रखने की रणनीति साफ झलकती है।

इन नेताओं पर सबकी निगाह

जदयू कोटे से जिन नामों की चर्चा है, उनमें डॉ. अशोक चौधरी, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, मदन सहनी और सुनील कुमार जैसे अनुभवी नेता शामिल हैं। वहीं कुछ नए चेहरों को मौका देकर राजनीतिक संतुलन और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की जा रही है। बड़ी जोर-जोर से चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत भी मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं।

 

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भाजपा की ओर से विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, नीतीश मिश्रा और रामकृपाल यादव जैसे बड़े नामों की चर्चा है। इसके अलावा युवा और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए भी कई नामों पर विचार किया गया है।

चार सीटें खाली रहने की संभावना

सूत्रों के मुताबिक इस बार चार मंत्री पद जानबूझकर खाली छोड़े जा सकते हैं, ताकि आने वाले समय में राजनीतिक जरूरतों और समीकरणों के हिसाब से दूसरे चरण में विस्तार किया जा सके। मई के अंत में विधान परिषद चुनाव की घोषणा के बाद एक और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

पटना में उत्सव जैसा माहौल, सुरक्षा कड़ी

इस बड़े आयोजन को लेकर राजधानी पटना को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक झंडे, बैनर और स्वागत द्वार लगाए जा रहे हैं। भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने तैयारियों की जिम्मेदारी स्थानीय इकाइयों और विधायकों को सौंपी है। सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह अलर्ट हैं। प्रधानमंत्री और अन्य वीआईपी मेहमानों की मौजूदगी को देखते हुए शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर भीड़ नियंत्रण तक हर स्तर पर व्यापक तैयारी की गई है।

राजनीतिक संदेश भी होगा स्पष्ट

यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ मंत्रियों के शपथ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए एनडीए सरकार आने वाले चुनावों के लिए अपनी रणनीति और सामाजिक समीकरणों का भी संकेत देगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम सूची में किन चेहरों को मौका मिलता है और यह विस्तार बिहार की राजनीति में कौन सा नया संदेश देता है।