इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में हुई नॉन-वेज इफ्तार पार्टी के मामले में राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 17 अप्रैल को तीन युवकों दानिश सैफी, नूर इस्लाम और आमिर कैफी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। 

 

कोर्ट ने अगली सुनवाई 24 अप्रैल को तय की है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील मोहम्मद वसीम ने कहा कि इन युवकों को मामले में झूठा फंसाया गया है। वहीं, अतिरिक्त सरकारी वकील उमा शंकर मिश्रा ने जमानत का विरोध किया और जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने के लिए समय मांगा।

 

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था पूरा मामला?

15 मार्च को रमज़ान का रोज़ा खोलने के लिए तीन युवक गंगा नदी पर नाव में इफ्तार पार्टी कर रहे थे। बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष राजत जायसवाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने मीट खाया और कचरा नदी में फेंक दिया, जिससे एक खास समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

 

16 मार्च को कोतवाली थाने में राजत जायसवाल ने इस घटना की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में केस दर्ज किया गया, जिसमें पूजा स्थल को अपवित्र करना, धार्मिक भावनाएं भड़काना और फिरौती जैसे आरोप शामिल हैं। अब हाईकोर्ट इस मामले में राज्य सरकार का जवाब देखने के बाद आगे फैसला करेगा।

 

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